NHRC की टेढ़ी नजर, नागपुर मंडल में स्टेशन मास्टर्स का शोषण! रेलवे बोर्ड अध्यक्ष-आयुक्त को नोटिस जारी

Exploitation of Railway Employees: एनएचआरसी ने नागपुर मंडल के स्टेशन मास्टर्स के मानवाधिकार उल्लंघन पर रेलवे बोर्ड को नोटिस भेजा। 4 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश।
Exploitation of Railway Employees: एनएचआरसी ने नागपुर मंडल के स्टेशन मास्टर्स के मानवाधिकार उल्लंघन पर रेलवे बोर्ड को नोटिस भेजा। 4 सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश।
स्टेशन मास्टर (सौजन्य-IANS)
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Human Rights Violation in Railway: एक अभूतपूर्व मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य रेल नागपुर मंडल में कार्यरत स्टेशन मास्टरों के मानवाधिकार उल्लंघन के मामले में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष (सीआरबी) और मुख्य श्रम आयुक्त को नोटिस जारी किया है।

यह नोटिस एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी द्वारा दायर याचिका पर जारी किया गया है जिसमें स्टेशन मास्टर्स के शोषण और मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। यह मामला मध्य रेलवे के नागपुर मंडल से संबंधित है।

4 सप्ताह के भीतर जवाब दायर करने का आदेश

उल्लेखनीय है कि सेवानिवृत्त रेल कर्मी शिकायतकर्ता वीरेंद्र कुमार पालीवाल ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि रेलवे अधिकारी अनुचित श्रम प्रथाओं में लिप्त हैं। उनके साथ पूर्व ट्रैफिक इंस्पेक्टर अशोक कटारे सह-याचिकाकर्ता हैं। दोनों ने मंडल अधिकारियों की ओर से 13 प्रकार के उल्लंघनों का विवरण दिया है। प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी पीठ ने इस मामले को मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान में लिया। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर 4 सप्ताह के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत की जाए। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने केंद्रीय रेलवे प्रशासन से डेटा मांगा है, ताकि आयोग के समक्ष जवाब दाखिल किया जा सके। इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) को आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

सुनियोजित शोषण का गंभीर आरोप

शिकायत में कहा गया है कि नागपुर मंडल के अधिकारी स्टेशन मास्टर्स के अधिकारों का सुनियोजित शोषण कर रहे हैं। स्टेशन मास्टर्स को नियमित रूप से 8 घंटे की बजाय 12 घंटे की ड्यूटी के लिए मजबूर किया जाता है जो ऑवर्स ऑफ इम्प्लाइमेंट रेगुलेशन (एचओईआर) का सीधा उल्लंघन है।

इतना ही नहीं, ड्यूटी के बाद उन्हें निर्धारित 10 घंटे का विश्राम भी नहीं दिया जाता और सात-साढ़े सात घंटे के भीतर दोबारा ड्यूटी पर बुला लिया जाता है। इसके अलावा, लगातार रात्रि ड्यूटी, मनमानी पोस्टिंग, विरोध करने वालों के विरुद्ध अनुचित कार्रवाई और मूल्यांकन में भेदभाव जैसे कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर

शिकायत में कहा गया है कि इन अमानवीय कार्य प्रणालियों से कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और ट्रेन संचालन की सुरक्षा पर भी खतरा बढ़ रहा है। शिकायतकर्ताओं ने मानवाधिकार आयोग से अपील की है कि वह इन अनुचित श्रम प्रथाओं की जांच करे, शोषण को रोके, उचित मुआवजा सुनिश्चित करे और स्टेशन मास्टर्स के अधिकारों व गरिमा की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए।

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