

Nagpur Municipal Corporation Fire Department: नागपुर सिटी को आग की विभीषिका से बचाने के लिए प्रशासन ने करोड़ों की लागत से नए फायर स्टेशन तो तैयार कर दिए, लेकिन धरातल पर सच्चाई यह है कि इन केंद्रों पर ताले लटके हैं। वजह आग बुझाने के लिए जरूरी दमकलकर्मी और ड्राइवर ही मौजूद नहीं हैं।
नागपुर शहर में कर्मचारियों के अभाव के बावजूद महज चुनावी श्रेय और राजनीतिक लाभके लिए अधूरे प्रबंधों के बीच इन स्टेशनों का लोकार्पण कर दिया गया। आलम यह है कि सुगत नगर, वाठोड़ा और पारडी जैसे नवनिर्मित अग्निशमन केंद्रों के लिए आधुनिक गाड़ियां और उपकरण धूल फांक रहे हैं।
कमाल टॉकीज के पास स्थित लगभग 50-60 साल पुराना पाचंपावली फायर स्टेशन आरा मशीन क्षेत्र की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से बनाया गया था। इमारत जर्जर होने के कारण इसे खाली कर 2 साल पहले बनी सुगत नगर की नई इमारत में शिफ्ट तो कर दिया गया, लेकिन स्टाफ की पर्याप्त तैनाती नहीं हो सकी।
इसी तरह से लकड़गंज, सक्करदरा और डंपिंग यार्ड से सटे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए वाठोड़ा में कोर्ट कचहरी के विवाद के बाद दमकल केंद्र बनकर तैयार हुआ लेकिन जब तक निर्माण पूरा हुआ तब तक कार्यरत कर्मचारी सेवानिवृत्त हो गए।
इसके बावजूद 'स्टेशन खोलो और चार्ज लो' की होड़ में स्थानीय जनप्रतिनिधि और तत्कालीन व्यवस्थापकों के दबाव में अधिकारियों ने कर्मचारियों के बिना ही इसका जबरन उद्घाटन करवा दिया।
नागपुर शहर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत पारडी में बना फायर स्टेशन आधुनिक सुविधाओं और गुणवत्ता के लिहाज से बेहतरीन तैयार हुआ है। हालांकि यहां भी स्थिति ढाक के तीन पात जैसी ही है।
उपकरण और गाड़ियां तो मौजूद हैं, लेकिन उन्हें चलाने और आपात स्थिति में मौके पर पहुंचने वाला अमला नदारद है। वर्तमान में स्थिति यह है कि पुराने और प्रमुख स्टेशनों पर ही तीन से चार गाड़ियां खड़ी हैं।
यदि नए स्टेशनों पर कर्मचारी तैनात किए जाएं तो इन गाड़ियों को सुगत नगर, वाठोड़ा और पारडी में एक-एक कर वितरित किया जा सकता है। वर्तमान में विभाग चालकों और फायरमैन दोनों की भारी कमी से जूझ रहा है। कई जगहों पर एक ही व्यक्ति से चालक और फायरमैन दोनों की जिम्मेदारी ली जा रही है।
विभाग चालकों और फायरमैन दोनों में करीब 91-100 पदों पर नई नियुक्तियों की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जब तक यह अमला प्रशिक्षण पूरा कर प्रत्यक्ष कार्यस्थल पर नहीं उत्तरता तब तक इन नवनिर्मित स्टेशनों से शहरवासियों को वास्तविक राहत मिलना संभव नजर नहीं आ रहा है।