नागपुर में बढ़ा बड़ा कर्ज लेने का ट्रेंड, 6 साल में लोन पोर्टफोलियो 13,124 करोड़ से बढ़कर 79,210 करोड़ पहुंच
Nagpur MSME Loan Growth: नागपुर जिले में कर्ज वितरण की रफ्तार में भारी उछाल आया है। वर्ष 2025-26 में कुल 79,210 करोड़ का कर्ज बांटा गया, जिसमें एमएसएमई सेक्टर की हिस्सेदारी 30,110 करोड़ रही।
- Written By: रूपम सिंह
कर्ज वितरण (सोर्स- एआईज जनरेटेड इमेज)
Banking Sector Nagpur MSME Loan Growth: पिछले कुछ वर्षों में कर्ज बांटने के ट्रेंड में बदलाव देखने को मिल रहा है। बड़े कर्ज लेने वाले बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि कर्ज लेने वाले एकाउंट में कमी दर्ज की जा रही है, जबकि कर्ज राशि में अच्छी खासी वृद्धि देखी गई है। वहीं दूसरी ओर पिछले 5-6 वर्षों का डेटा देखें तो नागपुर जिले में कर्ज देने की रफ्तार में अनुमान से काफी ज्यादा वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2019-20 में नागपुर में 13,124 करोड़ रुपये का कुल बांटा गया था, जबकि 2020-21 में यह बढ़कर 27,700 करोड़ हो गया था।
वर्ष 2025-26 की बात करें तो नागपुर जिले में 79,210 करोड़ रुपये का कर्ज बांटा गया है। यानी 2020 से लेकर 2026 तक के बीच में 51,510 करोड़ रुपये का पोर्टफोलियो बढ़ गया है। इसे नागपुर की बढ़ती ‘हैसियत’ के तौर पर भी देखा जा सकता है। अच्छी बात यह है कि पहले एमएसएमई सेक्टर कर्ज हासिल करने के लिए मशक्कत करता था लेकिन अब एमएसएमई सेक्टर के ऊपर बैंक मेहरबान हैं।
2025-26 में इस सेक्टर को बैंकों ने 30,110 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है। केंद्र और राज्य सरकार एमएसएमई सेक्टर को रीढ़ मानती हैं और इसे बढ़ाने के लिए कई योजनाएं भी पेश कर रही हैं। इस योजनाओं में एक बात कर्ज उपलब्धता बढ़ाना भी है। यही कारण है कि बैंक प्राथमिकता के साथ इस सेक्टर को कर्ज दे रहे हैं। इस सेक्टर के बढ़ने के कारण ही बैंकों के पोर्टफोलियो में भी तेजी से इजाफा हुआ है।
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लगभग 10,000 करोड़ का इजाफा
सरकार ने कई सेक्टरों को एमएसएमई सेक्टर में लाने की घोषणा की थी। व्यापारियों को भी एमएसएमई के तहत लाया गया था। इसके साथ ही टर्नओवर के पैमाने में भी बदलाव किया गया था जिसके कारण कर्ज की राशि बढ़ी है। वर्ष 2024-25 में एमएसएमई सेक्टर को 20,589 करोड़ रुपये का कर्ज प्रदान किया गया था जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 30,110 करोड़ रुपये पहुंच गया है।
हालांकि यह एक दिलचस्प बात यह है कि कर्ज लेने वालों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। 2024-25 में जहां 1,72,094 लोगों ने एमएसएमई कर्ज का लाभ लिया था वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा 1,09,964 रह गया। स्पष्ट है कि कम लोग ज्यादा बड़ा कर्ज ले रहे हैं और कारोबार को बढ़ा रहे हैं। 2020-21 में एमएसएमई कर्ज का पोर्टफोलियो 6,470 करोड़ रुपये का ही था, जबकि तब भी 1,28,157 लोग इस सेक्टर में कर्ज ले रहे थे।
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कृषि टर्म लोन लेने वाले अधिक
क्रॉप लोन की बजाय अब किसान और कृषि से जुड़े लोग क्रॉप टर्म लोन लेने को प्राथमिकता दे रहे है। स्पष्ट है कि वे कृषि कार्यों को आधुनिक बनाने के जुगत में है। ट्रैक्टर, उपकरण खरीदी को महत्व देने लगे हैं। नागपुर जिले में पिछले वर्ष कुल 7,847 करोड़ रुपये का कुल कर्ज वितरण किया गया था जिसमें क्रॉप लोन की हिस्सेदारी 1,411 करोड़ रुपये रही, जबकि एग्री टर्म लोन की हिस्सेदारी 6,435 करोड़ रुपये पहुंच गई। इस श्रेणी में लोगों को ट्रैक्टर, नेट, सिंचन, उपकरण आदि खरीदने के लिए कर्ज प्रदान किया जाता है। वर्ष 2019-20 में एग्री लोन का आकार 1,305 करोड़ था जो 2020-21 में भी महज 3,262 करोड़ पहुंचा। आज यह 7,800 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है।
इन क्षेत्रों को मिलता है गैर प्राथमिक ऋण
- बड़े कॉर्पोरेट ऋण स्थापित बड़ी कंपनियों, फैक्ट्रयों और उद्योगों के लिए
कार्यशील पूंजी या प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग, - वाणिज्यिक रियल एस्टेट ऑफिस स्पेस, शॉपिंग मॉल, कॉम्प्लेक्स बनाने या खरीदने के लिए लोन।
- उपभोक्ता टिकाऊ ऋण टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन, या अन्य घरेलू
उपकरण खरीदने के लिए व्यक्त्तिगत लोन। - वाहन ऋण: निजी कार, दोपहिया वाहन या व्यावसायिक वाहनों के लिए
फाइनेंसिग। - व्यक्तिगत ऋण : चिकित्सा आपात स्थिति, शादी, यात्रा या अन्य व्यक्तिगत जरूरतों के लिए अनसक्योर्ड ऋण।
- क्रेडिट कार्ड सुविधाएं: क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अल्पकालिक ऋण।
- बुनियादी ढांचा ऋण: बड़े सड़क, बंदरगाह, या दूरसंचार परियोजनाएं, जो प्रत्यक्ष रूप से प्राथमिक क्षेत्र की शर्तों को पूरा नहीं करतीं।
शेयरों के बदले ऋण व्यक्तिगत या कॉर्पोरेट ग्राहकों को उनके शेयरों/प्रतिभूतियों के बदले में दिया जाने वाला ऋण।
