नागपुर में कार बिक्री के नाम पर धोखाधड़ी, 15 दिन तक FIR नहीं, खबर छपते ही हरकत में आई पुलिस
Nagpur OLX Fraud: OLX पर कार बिक्री के नाम पर 3.70 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में कार्रवाई नहीं होने पर सवाल उठे। मीडिया में मामला आने के बाद पुलिस ने जांच तेज की।
- Written By: अंकिता पटेल
ओएलएक्स ठगी, कार बिक्री धोखाधड़ी, (सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Nagpur Cyber Crime: नागपुर जिले में विश्वास तांडेकर के साथ ओएलएक्स के माध्यम से 4 लोगों ने कार बिक्री के नाम पर 3.70 लाख रुपये की धोखाधड़ी की। इस घटना की शिकायत दर्ज कराए 15 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मामले की जांच करने के बजाय नंदनवन पुलिस ने कोई पूछताछ नहीं की और न ही एफआईआर दर्ज की।
इसके विपरीत, उन्होंने विश्वास के कब्जे में मौजूद कार जब्त कर ली और उस पर समझौते के लिए दबाव बनाया लेकिन जब यह मामला ‘नवराष्ट्र’ ने उजागर किया तब नंदनवन पुलिस हरकत में आई और शुक्रवार को जांच शुरू की। तांडेकर ने बताया कि इसके अलावा वाठोडा पुलिस थाने में दी गई शिकायत पर भी रिश्वत प्रकरण में फंसी प्रणाली बेनके की जगह नए जांच अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।
शुक्रवार को दर्ज किया गया बयान विश्वास के अनुसार, शुभम ने भी कार खरीदने के लिए कुणाल से संपर्क किया था। जिस दिन शाम को कुणाल ने पैसे लेकर यह वाहन विश्वास के कब्जे में दिया उसी वाहन के टोकन के रूप में कुणाल ने उसी दिन सुबह शुभम से 10,000 रुपये वसूल लिए थे।
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इसकी जानकारी विश्वास ने 22 मई को ही अपने शिकायत आवेदन में पुलिस को दी थी लेकिन शुक्रवार को ‘नवराष्ट्र’ में खबर प्रकाशित होते ही नंदनवन पुलिस ने पूरे 15 दिनों बाद शुभम का बयान दर्ज किया। साथ ही नंदनवन पुलिस थाने के गोपीनाथ राखुंडे ने उससे वाहन से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां भी मांगी हैं।
चमत्कारिक तरीके से नंदनवन पुलिस की ‘एंट्री’
विश्वास ने 21 मई 2026 को वाठोडा पुलिस थाने में शिकायत दी थी। इसके बाद हाल ही में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग द्वारा रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार की गई पीएसआई प्रणाली बेनके को विश्वास के शिकायत आवेदन पर जांच अधिकारी नियुक्त किया गया था।
इसके तुरंत बाद, इस मामले में चमत्कारिक ढंग से नंदनवन पुलिस थाने के कर्मचारी गोपीनाथ राखुंडे की एंट्री हुई। मानो बेनके को सपने में ही पता चल गया हो कि इसी कार का मामला नंदनवन पुलिस थाने में गोपीनाथ राखुंडे के पास है।
जब्ती वैध या अवैध ?
धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद विश्वास सभी दस्तावेजों के साथ वाठोडा पुलिस थाने गया था। साथ ही उसने अपने मित्रों की मदद से चारों गैर-आवेदकों तक पहुंचने के प्रयास भी किए। उसने कुछ गैर-आवेदकों के परिवारजनों के फोन नंबर भी प्राप्त कर लिए थे। इस जानकारी का उपयोग कर ठगों के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने के बजाय गोपीनाथ राखुंडे ने बिना किसी एफआईआर के विश्वास के कब्जे वाली कार जब्त कर ली और सीधे नंदनवन पुलिस थाने ले आए।
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इसके बाद उन्होंने आरोपियों में से एक के साथ समझौता कराने के लिए विश्वास पर दबाव बनाने का प्रयास किया। हालांकि सवाल उठता है कि बिना एफआईआर और बिना किसी ठोस कारण के राखुडे ने यह वाहन किसके लाभ के लिए जब्त किया था। साथ ही यह जब्ती वैध थी या अवैध, इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
