एडमिट कार्ड से रिजल्ट तक गड़बड़ियां, 5 करोड़ के परीक्षा ठेके पर घिरा नागपुर विश्वविद्यालय; जांच की मांग तेज
Nagpur University News: नागपुर विश्वविद्यालय के 5 करोड़ रुपये के परीक्षा प्रबंधन ठेके को लेकर विवाद गहरा गया है। छात्रों ने तकनीकी खामियों और टेंडर प्रक्रिया की जांच की मांग तेज कर दी है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर विश्वविद्यालय, परीक्षा प्रबंधन, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur University Exam Management: नागपुर विश्वविद्यालय के परीक्षा प्रबंधन के लिए दिए गए 5 करोड़ रुपये के ठेके को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इसके साथ ही पूरी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया की जांच की मांग और तेज हो गई है। छात्र संगठनों द्वारा उठाए गए सवालों, परीक्षा प्रबंधन में कथित कमियों और ठेके को मंजूरी देने की प्रक्रिया पर जताए गए संदेह के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव काफी बढ़ गया है।
विश्वविद्यालय ने संबंधित तकनीकी सेवाओं के लिए एक निजी संस्थान को 3 साल की अवधि का ठेका दिया था। हालांकि इस ठेके के लागू होने के बाद से छात्रों की ओर से कई तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं। प्रवेश पत्रों (एडमिट कार्ड) में गलतियां, परीक्षा समय सारणी (टाइम टेबल) में गड़बड़ी, परिणाम घोषित होने में देरी और ऑनलाइन प्रणाली के बार-बार ठप होने जैसी घटनाओं से छात्रों में भारी आक्रोश है।
छात्र संगठनों का आक्रामक रुख इस
पृष्ठभूमि में विभिन्न छात्र संगठनों ने एकजुट होकर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाई है। संगठनों ने कुलपति, कुलसचिव और परीक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपकर पूरी निविदा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच
कराने की मांग की है।
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संगठनों का आरोप है कि संबंधित कंपनी का चयन करते समय कुछ महत्वपूर्ण शतों में बदलाव किए जाने का संदेह है। निविदा में पात्रता मानदंड, वित्तीय टर्नओवर की शर्त, अनुभव की आवश्यकता और छात्रों की संख्या से संबंधित जानकारी पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कुछ संगठनों ने निविदा प्रक्रिया के दौरान जमा किए गए दस्तावेजों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) पर भी संदेह जताया है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल छात्र, शिक्षक, अभिभावक और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी है। क्या निविदा प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार थी? छात्रों की शिकायतों में कितनी सच्चाई है? परीक्षा प्रबंधन में चूक के 5 के लिए कौन जिम्मेदार है? और भविष्य में ऐसी समस्याओं से बचने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे? इन सभी सवालों के जवाब इस रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का
मानना है कि इस मामले का नतीजा सिर्फ एक ठेके तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि यह विश्वविद्यालय के परीक्षा प्रबंधन की पारदर्शिता और छात्रों के भरोसे को भी प्रभावित करेगा।
कुलाधिपति कार्यालय ने मांगी रिपोर्ट
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलाधिपति कार्यालय द्वारा संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। नागपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी शिकायतों का संज्ञान लेने की बात कही है और स्पष्ट किया है कि वास्तविकता को सामने लाने के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निविदा प्रक्रिया, ठेका मजूरी, तकनीकी योग्यता और परीक्षा प्रबंधन के कामकाज की स्वतंत्र स्तर पर जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे का फैसला लिया जा सकता है।
परीक्षा प्रबंधन की परेशानियां बनीं चर्चा का विषय
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ सत्रों में कई छात्रों को प्रवेश पत्र की त्रुटियों, परीक्षा केंद्रों को लेकर भ्रम और परिणाम घोषित होने में हुई देरी का खामियाजा भुगतना पड़ा है।
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ऑनलाइन सिस्टम में बार-बार आने वाली तकनीकी दिक्कतों के कारण छात्रों को आवेदन करने और रिजल्ट चेक करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, इन सभी घटनाओं के बाद ही परीक्षा प्रबंधन के लिए नियुक्त एजेंसी की कार्यक्षमता पर सवाल उठने लगे और छात्र संगठनों ने निविदा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग तेज कर दी।
