इलेक्ट्रिक बसें (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
Electric Bus Expansion Nagpur: आपली बस संचालन भले ही शुरुआत से ही परिवहन विभाग के लिए घाटे का सौदा रहा हो किंतु कानून में प्रदत्त जिम्मेदारी के चलते अब लोगों को बस की सेवा देना विभाग की मजबूरी बन गया है। आलम यह है कि हर वर्ष नई बसों का बेड़ा जुड़ने और आपली बस के संचालन का दायरा बढ़ने के बावजूद हर वर्ष घाटा बढ़ता जा रहा है।
बहरहाल सोमवार को परिवहन विभाग वित्तीय वर्ष 2025-26 का संशोधित और वर्ष 2026-27 का प्रस्तावित बजट पेश करेगा। परिवहन विभाग द्वारा समिति को दिए जा रहे बजट का आंकड़ा इस वित्तीय वर्ष में 640 करोड़ तक जाने का अनुमान लगाया गया है जिसमें विशेष रूप से इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और डिपो के विकास पर ध्यान केंद्रित करने के अलावा यात्रियों को नवीनतम सुविधाओं के साथ आपसी बस सेवा का लक्ष्य रखा गया है।
सूत्रों की मानें तो 2026-27 के लिए अनुमानित परिचालन खर्च 302 करोड़, जबकि अनुमानित राजस्व 120 करोड़ आंका गया है। इससे 180 करोड़ से अधिक का घाटा होने का अनुमान है जिसे वित्तीय अनुदान के माध्यम से पूरा करने का इरादा है। पिछली योजनाओं में केंद्रीकृत मॉनिटरिंग के लिए सीताबर्डी में मोर भवन विस्तार में एक समर्पित ‘परिवहन भवन’ का निर्माण करना शामिल होने की जानकारी सूत्रों ने दी।
आगामी वित्तीय वर्ष के लिए 400 नई एसी (AC) इलेक्ट्रिक बसों की योजना बनाई गई है। इनमें से कोराडी और खापरी डिपो के लिए 75-75 एसी बसों का परिचालन शुरू होने की उम्मीद है जिससे ई-बसों के फ्लीट का विस्तार भी होगा। साथ ही नए रूट्स पर भी आवश्यकता अनुसार बसों के संचालन में वृद्धि की जा सकेगी।
बढ़ती इलेक्ट्रिक फ्लीट को सपोर्ट करने के लिए डिपो निर्माण हेतु 35 करोड़ और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए आवंटित किए जाने की संभावना है। इसमें वाड़ी में 3 एकड़ के प्लॉट पर एक नया डिपो बनाना भी शामिल है।
विज्ञापन अधिकारों, किराये और बीओटी आधार पर बस शेल्टरों के लिए ‘साइनपोस्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के साथ साझेदारी के माध्यम से अतिरिक्त आय उत्पन्न करने का सुझाव दिया गया है। इस साझेदारी से प्रति शेल्टर सालाना रॉयल्टी प्राप्त होगी। इसके अलावा परिवहन आय योजनाओं में ‘नागपुर दर्शन’ योजना से जुड़ी सेवाएं भी शामिल की गई हैं जो अतिरिक्त आय उत्पन्न करने का स्रोत माना जा रहा है।
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सिटी बसों के परिवहन की व्यवस्था अपने हाथों में लेने के बाद से परिवहन विभाग द्वारा हमेशा ही घाटे का बजट पेश किया गया। आय और खर्च में आने वाले इस अंतर को पाटने के लिए हमेशा से मनपा द्वारा अनुदान मांगा गया जिसके बलबूते बसों का संचालन होता रहा है। गत वर्ष मनपा की ओर से परिवहन विभाग को 170 करोड़ का अनुदान दिया गया था किंतु इस वर्ष मनपा आयुक्त ने परिवहन विभाग को केवल 150 करोड़ देने का मानस जताया है।
पहले ही नुकसान में चल रहे परिवहन विभाग के अनुदान में कटौती करने से विभाग के अधिकारियों के माथे पर बल पड़ने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार भले ही आयुक्त ने अनुदान घटाया हो लेकिन स्थायी समिति की ओर से प्रस्तुत होने वाले आम बजट से पहले परिवहन सभापति द्वारा दिए जाने वाले बजट में अनुदान बढ़ाने की डिमांड की जाएगी।