सोनम वांगचुक के साथ खड़ा हुआ नागपुर, तत्काल रिहा करने की मांग, कल धरना आंदोलन का ऐलान
Protest in Nagpur: लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर सोनम वांगचुक के नेतृत्व में सड़क पर उतर आए है। इस पर रोक लगाने के लिए सोनम वांगचुक को गिरफ्तार किया जिससे देश भर में आक्रोश बढ़ा।
- Written By: प्रिया जैस
सोनम वांगचुक (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Sonam Wanchuk: पर्यावरणविद्, शिक्षाविद् और वैज्ञानिक सोनम वांगचुक को तत्काल और बिना शर्त रिहा करने और लद्दाख को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर 7 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से संविधान चौक पर धरना आंदोलन होने की जानकारी ‘हम भारत के लोग’ बैनर तले विभिन्न संगठनों की ओर से पत्र परिषद में दी गयी।
रविवार को वांगचुक के समर्थन में रवि भवन में पत्र परिषद का आयोजन किया गया। केंद्र सरकार के रवैये की कड़ी निंदा करते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिया गया है। उनकी गिरफ्तारी तब हुई जब उन्होंने 24 सितंबर, 2025 को लेह में अपने भूख हड़ताल को इस आधार पर समाप्त कर दिया था कि आंदोलन ने हिंसक स्वरूप ले लिया है।
लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर वांगचुक उपोषण कर रहे थे। पत्र परिषद में प्रकाश दार्शनिक, सुधांशु मोहोड, सुनील सारिपुत्त, शंकर ढेंगरे, नरेश वाहाने, मिलिंद पखाले, भूपेश थुलकर, अरूण गाडे, प्रकाश कुम्भे, राजन वाघमारे उपस्थित थे।
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आतंकियों की तरह बर्ताव
पत्र परिषद में कहा गया कि वांगचुक को आतंकियों पर लगाए जाने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है। उनकी गिरफ्तारी के समय उनकी पत्नी घर पर नहीं थीं और उन्हें बाद में फोन करके सूचित किया गया कि पति को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने उनकी लोकेशन या उनके ऊपर लगे आरोपों पर भी कोई जानकारी नहीं दी।
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उन्हें जोधपुर जेल (राजस्थान) ले जाया गया है। संगठनों ने जोर देकर कहा कि सोनम वांगचुक द्वारा उठाई गईं मांगें उनकी अपनी नहीं थीं। ये मांगें 2019 में जम्मू-कश्मीर के यूनियन टेरिटरी में विभाजन के समय देश के गृह मंत्रालय द्वारा लद्दाख की जनता को दिए गए आश्वासन पर आधारित थीं।
