
मसाले का बाजार (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Jeera Price Today Nagpur: मसालों में जीरे, राई, कलमी और धने की कीमतें किचन का स्वाद बिगाड़ने लगी हैं। पिछले कुछ दिनों में इनकी कीमतों में 20 से 30 रुपये प्रति किलो उछाल देखने को मिल रहा है। जीरा के बड़े उत्पादक राज्यों में बुआई देर से हो रही है। इसके चलते दुनिया भर में जीरे का संकट गहरा रहा है। इसी वजह से जीरा जहां लगातार महंगा होता जा रहा है।
इसके साथ धना और राई की भी कीमतें बढ़ती जा रही हैं। थोक में जीरा क्वालिटी अनुसार 290 से 300 रुपये प्रति किलो पर चल रहा है। इसमें मीडियम माल 260 से 270 रुपये प्रति किलो चल रहा है। चिल्लर में इसके भाव क्वालिटी अनुसार 300 से 350 रुपये प्रति किलो से ऊपर बताये जा रहे हैं।
वहीं मसाले में पड़ने वाला शाहजीरा भी जमकर महंगाई का झटका देने पर तुला हुआ है। यह 100 रुपये प्रति किलो की तेजी के साथ 950 से 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है जो कि पहले 850 से 900 रुपये प्रति किलो चल रहा था। इन तीनों की बढ़तीं कीमतों की वजह से गृहिणियों को तड़का लगाना पड़ महंगा पड़ने लगा है।
व्यापारियों के अनुसार जीरे की कीमतें अभी और बढ़ने का अनुमान है। गुजरात और राजस्थान दोनों प्रमुख उत्पादक राज्यों में इस बार मौसम गड़बड़ा गया। खेतों में नमी ज्यादा रही। मिट्टी देर से सूखी। इसके कारण किसान बुआई शुरू नहीं कर पाए। वहीं थोक मार्केट में धना मीडियम माल जहां 140 से 150 रुपये प्रति किलो पर चल रहा है वहीं ऊंचे बारीक माल 165 से 175 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है।
वहीं चिल्लर में इसके भाव 180 रुपये प्रति किलो से ऊपर चल रहे हैं। 100 रुपये प्रति किलो वाली राई 20 रुपये बढ़कर 120 रुपये पर पहुंच गई है। इसके अलावा मोटी राई 90 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई। चिल्लर में इसके भाव अधिक बताये जा रहे हैं। इसके साथ कलमी 280 रुपये प्रति किलो पर थोक में पहुंची है, जो कि चिल्लर में 300 रुपये के ऊपर चल रही है।
| मसाला | थोक भाव (₹/किग्रा) | चिल्लर भाव (₹/किग्रा) | वृद्धि (प्रति किलो) |
| जीरा (Quality) | ₹290 – ₹300 | ₹300 – ₹350+ | ₹20 – ₹30 |
| धनिया (बारीक) | ₹165 – ₹175 | ₹180+ | ₹15 – ₹20 |
| राई | ₹120 | ₹140+ | ₹20 |
| शाहजीरा | ₹950 – ₹1000 | ₹1100+ | ₹100 |
| कलमी | ₹280 | ₹300+ | ₹20 |
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ऊंझा मंडी में आवक बेहद कम है। यही मंडी जीरे का प्रमुख ट्रेडिंग हब है। कम आवक ने बाजार में और तेजी भर दी है। उत्पादन अनुमान भी चिंता बढ़ा रहा है। व्यापारियों के अनुसार इस वर्ष जीरा उत्पादन 1.10 करोड़ बोरी से घटकर सिर्फ 90-92 लाख बोरी रहने का अनुमान है।
स्थानीय बाजारों में सप्लाई की कमी का यह सबसे बड़ा कारण है। वैश्विक मोर्चे पर भी हालात अच्छे नहीं हैं। व्यापारियों के अनुसार मौसम और भू-राजनीतिक तनाव ने निर्यात के लिए उपलब्ध जीरा कम कर दिया है।






