नागपुर में सस्ती रेत योजना फेल, डिजिटल निगरानी के बावजूद अवैध खनन जारी; सिस्टम पर उठे सवाल
Nagpur Illegal Sand Mining: नागपुर में 600 रुपये प्रति ब्रास सस्ती रेत योजना फेल। निगरानी सिस्टम के बावजूद अवैध खनन और कालाबाजारी पर लगाम नहीं लग पाई।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर रेत नीति फेल( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nagpur Sand Policy: नागपुर जिले में आम नागरिकों को सस्ते दाम पर रेत उपलब्ध कराने का पूरा सरकारी सिस्टम ही फेल हो गया है। इसे फेल किया है सिस्टम के ही नुमाइंदों ने। राज्य सरकार ने आम नागरिकों को सस्ती दर पर रेत उपलब्ध कराने के लिए 600 रुपए प्रति ब्रास की दर पर रेत देने की नीति वर्ष 2023 में लागू की थी।
इसका मुख्य उद्देश्य घर निर्माण लागत कम करना, अवैध रेत खनन रोकना और आम जनता को पारदर्शी तरीके से रेत उपलब्ध कराना था। यह नीति आम नागरिकों को सस्ती रेत उपलब्ध कराने और रेत माफिया व काला बाजारी पर नियंत्रण करने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
रेत्त घाटों में गाड़ी पहुंचने, लोड होने और उसके निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने की निगरानी के लिए पुणे की एक कंपनी को ठेका दिया गया जिसने डिजिटल सिस्मट तैयार किया।
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सूत्रों की मानें तो इस सिस्टम को बनाने वाले ने ही इसे ‘हैक’ कर लिया, अपने मूल उद्देश्य को छोड़कर उसने रेत माफियाओं व संबंधित यंत्रणा को ‘सेट’ कर वारे-न्यारे शुरू कर दिये।
रेत चोरी रोकने का सिस्टम ही कमाई का जरिया बना लिया गया। बताया जाता है कि अकेले नागपुर के विविध रेत घाटों पर सैकड़ों वाहन लोड हो रहे हैं। अवैध उत्खनन व दुलाई वाले एक वाहन से 3.50 लाख रुपये महीने की ‘देन’ वसूली जाती है।
अगर ऐसे 500 वाहन भी पकड़े तो 17.50 करोड़ रुपये महीने का चूना लगाया जा रहा है। वर्षभर में यह 210 करोड़ रुपये होता है।
चिखली, बुलढाना की मारते हैं रायल्टी सूत्र ने दावा किया कि कन्हान नदी के नेरी घाट से रोज 150 से 200 वाहन भरे जा रहे हैं लेकिन
रायल्टी चिखली, बुलढाना की मारते हैं।
इतना ही नहीं वाहनों में उसकी क्षमता से अधिक रेत लोड की जा रही है। 5 ब्रास की क्षमता वाले ट्रकों में 8-8 बास रेत भरी जाती है। इसका तो हिसाब ही नहीं है। कितने ट्रक किस घाट पर पहुंचते हैं, ऑनलाइन डिजिटल सिस्टम से तत्काल संबंधित विभाग के अधिकारी को जानकारी मिल जाती है।
मगर लोड होने वाले वाहनों की संख्या कहीं कम दशांई जाती है। कितनी चोरी किस घाट से हो रही है सबको पता है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। कभी शिकायत हो गई तो छुटपुट कार्रवाई की जाती है।
इसलिए पड़ती है रेत महंगी
पहले सेपरेट घाट की नीलामी होती थी। अब तहसील-वार मतलब एक तहसील में जितने घाट हैं उन्हें एक साथ क्लब कर नीलाम किया जाता है। जिस घाट में रेत नहीं निकलती वह भी इसमें शामिल होता है। इससे घाट का ठेका लेने वाले को रेत महंगी पड़ती है, जबकि सरकार रेत सस्ती उपलब्ध कराने का दावा करती है।
पक्ष व विपक्ष सभी हैं शामिल
बिना राजनीतिक संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर गौण सानिज का अवैध उत्खनन व परिवहन हो ही नहीं सकता। चाहे फिर यह सत्ताधारी ही या विपक्ष के कर्णधार, अपने-अपने इलाके में इन्हें माफियाओं से मोटी रकम पहुंचाए जाने का दावा भी सूत्र ने किया है।
रेत तस्करी में वर्चस्व की लड़ाई में नागपुर सहित अनेक जिलों में हत्याएं भी हो चुकी हैं। कुछ ऐसे माफियाओं के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ है जिनके संबंध सीधे राजनीतिक पार्टी व इलाके के दिग्गज नेताओं के साथ है।
आईटी, ईडी भी मूकदर्शक
गौण खनिजों में रेत सबसे महत्वपूर्ण है और यह रेत माफियाओं के लिए सोना बन गया है। इसकी तस्करी में जुटे छुटभेव्ये भी मालामाल हो चुके हैं। सरकारी तंत्र में शामिल विभागों के जो कर्णधार माफियाओं से मिले हुए है उनकी तो उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में है।
इस गोरखधंधे में जुटे लोग 2-3 वर्षों में ही इतना ‘पीट’ चुके हैं अब लक्जरी वाहनों में नजर आते हैं, कई बार दिखावे की छोटी-मोटी कार्रवाइयां भी होती है। आश्चर्य की बात यह भी है कि बेहिसाब नंबर दो की कमाई करने वाले माफियाओं की ओर से आईटी और इंडी विभाग भी मुकदर्शक बना हुआ है।
वाट्सएप ग्रुप से अधिकारियों को किया जाता है ‘ट्रैक’
माफिया इतने शातिर हैं कि घाट से निकलते ही वाहन के जीपीएस सिस्टम की बंद कर देते हैं, ताकि रूट का पता न चल सके। बावजूद ऐसे वाहनों की ओर देखा तक नहीं जाता।
अगर कोई अधिकारी कार्रवाई करने भी निकले ती विभाग के विभीषण’ उसकी सूचना संबंधित को दे देते हैं।
सूत्र ने दावा किया कि रेत तस्करी में लगे माफियाओं के 8 से 10 वाट्सएप ग्रुप है।
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हर ड्राइवर इन ग्रुप में जुड़े है। कार्रवाई करने निकलने वाले अधिकारी को ट्रैक कर उसकी लोकेशन तक वायरल कर दी जाती है। इससे अधिकारी की जान की भी खतरा है।
खनिकर्म व राजस्व विभाग के अनेक अधिकारियों पर वाहन चढ़ाकर हत्या करने या फिर हत्या का प्रयास करने की कई घटनाएं हो चुकी है।
यह साइबर क्राइम है और ऐसे वाट्सएप ग्रुप की जांच कर एडमिन को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
