

Medicine Shortage Nagpur: प्रादेशिक मनोरुग्णालय में मनोविकार से संबंधित जरूरी दवाइयां नहीं मिल रही हैं। मरीजों को बाहर से खरीदकर लाने की सलाह दी जा रही है। इस हालत में सरकार का दवाइयों की कमी नहीं होने देने का दावा महज खोखला साबित हो रहा है। प्रादेशिक मनोरुग्णालय की ओपीडी में हर दिन करीब 300 मरीज आते हैं। वहीं 500 से ज्यादा मनोरोगी विविध वार्डों में भर्ती हैं।
इनमें 280 पुरुष, 250 महिला मरीजों का समावेश है। वॉर्ड में भर्ती मरीजों की नियमित जांच, स्वच्छता, काउंसिलिंग, भोजन व औषधोपचार की व्यवस्था प्रशासन को ही करनी पड़ती है। सरकार ने औषध प्राधिकरण मंडल को दवाइयां खरीदने का अधिकार दिया है। इसमें स्थानीय स्तर पर प्रशासन को केवल 30 फीसदी खरीदी का ही अधिकार है। इसके लिए भी नियमों की सख्ती है।
इस हालत में स्थानीय स्तर पर सभी तरह की दवाइयां नहीं खरीदी जा सकतीं। मनोरोगियों के उपचार के लिए कुल 10 तरह की दवाइयां उपलब्ध रहती हैं। पिछले डेढ़ वर्ष से कई दवाइयों का आपूर्ति नहीं होने से दिक्कतें आ रही हैं, जबकि नियमानुसार मरीजों को बाहर से दवाई खरीदने के लिए नहीं कहा जा सकता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार हृदय के बाद डिप्रेशन दूसरा सबसे आम मेंटल डिसऑर्डर है। बढ़ते तनाव की वजह से आने वाले वर्षों में तनाव जैसे मेंटल डिसऑर्डर बढ़ने की संभावना है। इस संबंध में वैद्यकीय अधीक्षक डॉ. सतीश हुमणे ने बताया कि अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है।
इस वजह से दवाई की भी मांग बढ़ी है। फिलहाल करीब 550 मरीज भर्ती हैं। इन मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराना अनिवार्य है। हर माह 10 से 12 लाख रुपये दवाइयों पर खर्च होते हैं। जिला शल्य चिकित्सक कार्यालय से दवाइयों की आपूर्ति की मांग की गई है। 2-3 दिन में आपूर्ति हो जाएगी।