नागपुर में चला रेलवे का बुलडोजर, मिट्टी में मिले महलों जैसे घर, नौशाद-इप्पा का ठिकाना भी ध्वस्त
Nagpur Railway Encroachment: नागपुर मोतीबाग में रेलवे ने तीसरी लाइन के लिए 145 अतिक्रमण हटाए; AC कमरे, नशा गिरोह के ठिकाने उजागर, नौशाद-इप्पा गैंग पर बड़ा खुलासा।
- Written By: प्रिया जैस
मोतीबाग में बुलडोजर कार्रवाई (सौजन्य-नवभारत)
Third Rail Line Nagpur: नागपुर स्टेशन से राजनांदगांव के बीच तीसरी लाइन के लिए मोतीबाग परिसर में अड़ंगा बने 145 अतिक्रमण को हटाने के लिए शनिवार सुबह एसईसीआर, नागपुर मंडल की ओर से बड़ा अभियान चलाया गया। तनावपूर्ण माहौल में 200 से अधिक आरपीएफ, पुलिस और दंगा विरोध दस्ते के सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में 3 जीसीबी मशीन से तोडफोड़ शुरू हुई तो सजे-धजे और एसी वाले कमरे तक मिले।
ये कमरे गांजा और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री में शामिल नौशाद-इप्पा गैंग के छुपे हुए ठिकाने बताये गये। देर शाम तक चली कार्रवाई में करीब 6 दशक से अवैध रूप से कब्जाया गया 145 में 32 घरों के अतिक्रमण को रेलवे ने साफ कर दिया।
पहले चाय पीने दो…
एसईसीआर, नागपुर मंडल प्रबंधन द्वारा वर्ष 2022 से ही यहां रहने वालों को अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस देने का दौर जारी था। वर्ष 2025 में अक्टूबर माह से लगातार अतिक्रमणकारियों को हटने के लिए कहा जा रहा था।दिसंबर माह के पहले 3 सप्ताहों में 3 बार उद्घोषणा द्वारा सूचित भी किया गया, लेकिन किसी ने भी नहीं सुनी।
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शनिवार सुबह 6 बजे से रेलवे अधिकारी भारी पुलिस और आरपीएफ बल की सुरक्षा में 2 जेसीबी लेकर पहुंचे। सभी को एक बार फिर अपना सामान हटाने को कहा गया तो जवाब मिला कि अभी चाय पी रहे हैं। थोड़ी देर बार हटायेंगे। अतिक्रमणकारियों की मनमर्जी से 9 बजे कार्रवाई शुरू हो सकी।
रेलवे अधिकारी पहले ही नैरोगेज पटरी से दूरी पर लोहे के एंगल गाड़ चुके थे। ऐेसे में कुछ लोगों ने पहले ही इस सीमा में आने पर अपना अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया लेकिन इसके सामने वाले लोग तोड़ू कार्रवाई शुरू होने तक सामान कमरों से निकालते रहे।
AC रूम, शेड वाली कार पार्किंग
- यहां पर शहर में नशीले पदार्थों की तस्करी और बिक्री करने वाले नौशाद-इप्पा का ठिकाना भी था।
- अतिक्रमण उन्मूलन के दौरान टीन के शेड की छत वाला एक ऐसा कमरा मिला जिसे बेहतरीन तरीके से फर्निश किया गया था।
- शानदार बाथरूम, महंगी टाइल्स और प्लाईवुड के बेहतरीन फर्नीचर से सजा यह कमरा बाहर से झोपड़ी सरीखा नजर आ रहा था।
- इस कमरे को छुपाने के लिए दीवारों पर बैनर लगा दिये गये थे। दूसरी जेसीबी ने आगे से तोड़ने की कार्रवाई शुरू की।
- यहां पक्की दीवारों से बने एक बड़े शेड को तोड़ना शुरू किया तो पता चला कि यहां नौशाद और इप्पा की कार पार्किंग है।
- यहीं पर उन्होंने अपने लिए एक वातानुकूलित जिम भी बनाया हुआ था। इस जिम को भी जेसीबी ने जमींदोज कर दिया।
3 पीढ़ियां बीत गईं…
यहां रहने वाली एक वृद्ध महिला संध्या जीवतोड़े (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उनकी 3 पीढ़ियां यहां बीत गईं। हालांकि उन्हें अतिक्रमण उन्मूलन कार्रवाई का उतना दुख नहीं है क्योंकि मेहनत करके उनका बेटा सरकारी नौकरी में लग चुका है, लेकिन अपनी बेटी और दामाद की आर्थिक स्थिति को देखते हुए यहां रहना पड़ रहा था।
मोतीबाग में ध्वस्त मकान (सौजन्य-नवभारत)
वहीं, रामकिशोर चांदे (बदला हुआ नाम) ने कहा कि अब ये टूटने के बाद कहीं किराये का कमरा देखना होगा। हालांकि मार्किंग के अनुसार अब भी हमारे लिए कुछ जगह बच सकती है। यदि नहीं बची तो यहां से जाना पड़ेगा। वहीं, पता चला कि सरकार ने यहां रहने वाले कुछ लोगों को घर भी दिये थे लेकिन उन्होंने वे घर बेच दिये और दोबारा इसी झोपड़पट्टी में रहने आ गये।
…लोगों के चेहरे पर दिखा गैंग का खौफ
पुलिस की सुरक्षा में शुरू हुई तोड़ू कार्रवाई में नौशाद के एसी कमरे वाली झोपड़ी के बाद कार पार्किंग को तोड़ना शुरू किया गया। इस दौरान वहां मौजूद लोगों में दोनों का खौफ नजर आ रहा था। कोई भी इतना बड़ा और पक्का निर्माण करने वालों का नाम लेने से डर रहा था।
तोड़ू कार्रवाई तेज होने के समय मौके पर कुछ ऐसे भी संदिग्ध दिखाई दिये जिनके पहनावे से वे झोपड़पट्टी के नजर नहीं आ रहे थे और अंदरूनी भाग से एलईडी टीवी, फर्नीचर आदि हटा रहे लड़कों पर नजर रखे हुए थे।
बुलानी पड़ी तीसरी जेसीबी, पोकलेन मशीन
अतिक्रमणकारियों के निर्माण और फैलाव को देखकर रेलवे अधिकारियों को समझ आया कि केवल 2 जेसीबी से कार्रवाई पूरी नहीं की जा सकती है। ऐसे में करीब 10 बजे तीसरी जेसीबी और एक पोकलेन मशीन बुलाई गई।
उधर, कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से होते देख बिजली विभाग के कर्मचारियों ने भी काम शुरू कर दिया और कनेक्शन व वायर काटने लगे। इस बीच रेलवे अधिकारियों ने नोटिस के आधार पर टीन के झोपड़ों पर तोड़ने के लिए मार्किंग शुरू की तो विरोध शुरू हो गया।
जेसीबी पर चढ़ी महिला
शुरुआती आराम के बाद सुबह करीब 9.30 बजे अचानक महिलाओं और लड़कियों का एक समूह तैयार हो गया और पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई का विरोध करने लगा। माहौल गर्माता देख मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी ने उन्हें बताया कि जिनके नाम का नोटिस है, उनका ही अतिक्रमण तोड़ा जायेगा।
मोतीबाग में जनता का विरोध (सौजन्य-नवभारत)
इस समय विरोध शांत हो गया लेकिन एक घंटे बाद ही एक महिला जेसीबी मशीन पर चढ़ गई और कार्रवाई रोकने का प्रयास किया। महिला पुलिस ने तुरंत महिला को उतारा और एक किनारे कर दिया। इस बीच एक बार फिर माहौल गरम हो गया था लेकिन पुलिस बल के आगे किसी की कुछ नहीं चली।
…तो 1996 में ही साफ हो जाता अतिक्रमण
रेलवे ने 1996 में भी यहां अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया था लेकिन तत्कालीन विधायक और नये-नये पार्षद ने कार्रवाई रुकवा दी थी। इस दौरान माहौल इतना गरम हो गया था कि लोगों ने अतिक्रमण उन्मूलन दस्ते पर पत्थरबाजी कर दी थी।
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इस दौरान कई लोग घायल भी हुए थे। संभवत: रेल अधिकारियों को यह जानकारी थी। इसलिए वे पहले से ही हेलमेट पहनकर झोपड़ों को चिन्हित कर रहे थे। पुलिस ने भी दंगा विरोधी दस्ता तैनात किया था।
दोपहर बाद भड़का धार्मिक रोष
दोपहर बाद कार्रवाई तेज होते ही मौके पर 2 धार्मिक गुटों में तनाव बढ़ गया। दोनों ही अपने खिलाफ हो रही कार्रवाई पर एकदूसरे पर आरोप लगाते हुए गालीगलौच करने लगे। हालांकि रेलवे ने वहां मौजूद धार्मिक स्थलों को नहीं तोड़ा। इसके बावजूद धार्मिक तनाव बन गया। हालांकि भारी संख्या में मौजूद पुलिसकर्मियों और आरपीएफ कर्मियों ने मोर्चा संभाला और तनाव अधिक बढने से रोक दिया।
परिसर में फैली शराब, गांजे की बदबू
जेसीबी द्वारा जारी तोडू कार्रवाई के दौरान इप्पा के घर से अचानक एक ड्रम फूट गया। इसके बाद मौके पर अचानक शराब की बदबू फैल गई। थोडी ओर तोडफोड के बाद गांजे सरीख बदबू भी परिसर में महसूस की जाने लगी। यहीं पर इप्पा के जिम का सामान भी रखा था। जेसीबी ने सारा सामान और पूरी नशीले पदार्थ मौके पर ही दफन कर दिये। इतना ही नहीं, आसपास का सारा कबाड़ भी इसके ऊपर जमा कर दिया गया।
