नागपुर मनपा में कर वसूली को लेकर तीखी बहस, गरीबों के लिए अभय योजना की मांग; सदन में उठा मुद्दा
Nagpur Tax Collection Issue: नागपुर मनपा में संपत्ति कर, रिबेट और समय सीमा पर तीखी बहस। ऑनलाइन-ऑफलाइन भुगतान में भेदभाव के आरोप, गरीबों के लिए अभय योजना लागू करने की मांग।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर संपत्ति कर,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Property Tax: नागपुर महानगर पालिका की बुधवार को हुई आम सभा की बैठक में संपत्ति कर वसूली, कर भुगतान की समय सीमा और कर छूट (रिबेट) के नियमों को लेकर जमकर बहस का नजारा देखने को मिला। विपक्षी नेता संजय महाकालकर और सदन के अन्य सदस्यों ने कर वसूली की प्रक्रिया, 9 महीने की समय सीमा और ऑनलाइन तथा ऑफलाइन कर दाताओं के बीच हो रहे कथित भेदभाव को लेकर प्रशासन से तीखे सवाल किए, विपक्ष के पार्षद विवेक निकोसे ने भी अभय योजना लागू कर गरीब सम्पत्तिधारकों को न्याय देने की मांग की।
‘अभय योजना’ दोबारा लागू करने की मांग और वारंट शुल्क पर सवाल
सदन में विपक्षी नेता संजय महाकालकर ने यह अहम मुद्दा उठाया कि मनपा में कर वसूली के लिए 12 महीने के बजाय केवल 9 महीने का ही वर्ष माना जाता है, जिसे बढ़ाकर 12 महीने करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा जाना चाहिए, इसके अलावा दिसंबर के बाद कर भरने पर लगने वाले 4 प्रतिशत वारंट शुल्क (शास्ती) के कानूनी आधार पर भी सवाल खड़े किए गए, विपक्ष ने यह भी मांग की कि पिछले 5-6 वर्षों से लंबित करों के जुमनि और व्याज पर 80% तक की भारी छूट देने वाली ‘अभय योजना’ को इस वर्ष भी लागू किया जाए, जिसके लिए पहले भी निवेदन दिया जा चुका है लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।
प्रशासन का जवाब, नियमों के तहत हो रही है कार्रवाई
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए राजस्व विभाग के उपायुक्त मिलिंद मेश्राम ने स्पष्ट किया कि मनपा का कामकाज महाराष्ट्र महानगर पालिका अधिनियम 1949 के तहत चलता है। अधिनियम के अध्याय 11 की धारा 127 और अनुसूची ‘घ’ के कराधान नियम 41 के अनुसार, कर छमाही आधार पर लगाया जाता है।
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पहले 6 महीने का कर बिल मिलने के 90 दिनों के भीतर और दूसरे 6 महीने का कर 31 दिसंबर से पहले भरना अनिवार्य होता है। बकायादारों पर होने वाली वारंट कार्रवाई को उचित ठहराते हुए प्रशासन ने कराधान नियम 42 का हवाला दिया।
इसके तहत यदि कोई व्यक्ति कर और जुर्माना नहीं भरता है, तो आयुक्त को यह अधिकार है कि वह वसूली के खर्च सहित बकायेदार की चल-अचल संपत्ति को जब्त कर और उसे बेचकर पूरी रकम वसूल करे।
ऑनलाइन बनाम ऑफलाइन, क्या गरीबों के साथ हो रहा है भेदभाव? बैठक में एक बड़ा विवाद ऑनलाइन और ऑफलाइन कर दाताओं को मिलने वाली छूट के अंतर पर रहा।
पार्षद अभिषेक शंभरकर ने ध्यान आकर्षित किया कि ऑनलाइन कर भरने वालों को 15% की छूट दी जा रही है, जबकि मनपा कार्यालय (काउंटर) पर जाकर कर भरने वालों को केवल 10% की ही छूट मिल रही है।
उन्होंने तर्क दिया कि गरीब वर्ग मुख्य रूप से काउंटर पर जाकर कर जमा करता है, इसलिए यह नियम गरीबों को कम और अमीरों को ज्यादा फायदा पहुंचाने वाला प्रतीत होता है।
उन्होंने बताया कि इस बार लगभग 3,73,000 लोग कर जमा करने से वंचित रह गए हैं, जिसका एक कारण यह भेदभावपूर्ण नियम भी हो सकता है। सदस्यों ने यह भी शिकायत की कि ऑनलाइन प्रक्रिया में कभी-कभी प्रॉपर्टी ‘लॉक’ हो जाती है, इसलिए कर भुगतान का तरीका चाहे जो भी हो, सभी के लिए एक समान छूट का नियम लागू होना चाहिए।
डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने प्रशासन का तर्क
इस कथित भेदभाव पर उपायुक्त मेश्राम ने सफाई पेश की। उन्होंने बताया कि अधिनियम की धारा 140 के तहत मनपा सभागृह की अग्रिम कर भुगतान पर छूट (रिबेट) देने का अधिकार है। इसके अतिरिक्त, धारा 140-व (इकोलॉजिकल स्कीम) के तहत डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने और कागजात का उपयोग कम करने के उद्देश्य से ऑनलाइन भुगतान पर अधिक छूट दी जा रही है।
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प्रशासन ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की भी यही नीति है कि लोग ज्यादा से ज्यादा डिजिटल माध्यमों का उपयोग करें, हालांकि काउंटर पर भी 31 जुलाई से पहले कर जमा करने पर 10% और दिसंबर से पहले जमा करने पर 5% की छूट का प्रावधान रखा गया है। प्रशासन ने अंत में यह भी स्पष्ट किया कि कर में छूट से जुड़ा यह प्रस्ताव सदन के पटल पर है और इस पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मनपा सभागृह का ही है।
