नागपुर पुलिस ने पकड़ा गिरोह (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur Police: नागपुर में भूमि अभिलेख अधीक्षक से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगने के लिए 5 आरोपियों ने साउथ इंडियन फिल्म ‘विक्रम और शिवाजी बॉस’ से प्रेरित होकर जबरदस्त प्लानिंग की। लगातार अधिकारी को धमकाकर फिरौती मांगने लगे लेकिन रियल लाइफ ‘सिंघम’ उन पर हावी हो गए।
पुलिस ने बड़े ही पेशेवर ढंग से कार्रवाई को अंजाम देते हुए पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जिसमें एक युवती भी शामिल है जो अधिकारी के साथ ही कार्यालय में काम करती है। पुलिस ने सद्गुरुनगर, बेसा रोड निवासी प्रकाश मारोतराव ढगे (45) की शिकायत पर मामला दर्ज किया है।
पकड़े गए आरोपियों में देवरी, गोंदिया निवासी अतुल अनिल तागड़े (30), राहुल मीताराम पटले (21), नागभीड़, चंद्रपुर निवासी हिंदुस्तान वासुदेव रामटेके (27), देसाईगंज, गड़चिरोली निवासी निखिल राजू नांदेकर (28) और आमगांव, भंडारा निवासी प्रेक्षा बाबू कांबले (30) का समावेश है।
डीसीपी जोन-4 रश्मिता राव ने मीडिया को बताया कि पुलिस ने बड़े ही पेशेवर तरीके से इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसीपी नरेंद्र हिवरे के नेतृत्व में इंस्पेक्टर मुकुंद कवाड़े और उनकी टीम ने आरोपियों को मशक्कत के बाद ढूंढ निकाला। प्रकाश भंडारा स्थित भूमि अभिलेख विभाग में उप अधीक्षक पद पर कार्यरत हैं। प्रेक्षा भी इसी कार्यालय में लिपिक है।
अतुल देवरी में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलाता है और प्रेक्षा का ममेरा भाई है। निखिल और वासुदेव उसके साथ कॉलेज में पढ़ते थे। नवंबर महीने में अतुल की बहन की सगाई हुई। उसके विवाह के लिए अतुल को पैसे की जरूरत थी। प्रेक्षा के साथ उसकी अक्सर बातचीत होती थी। इसी दौरान प्रेक्षा ने उसे बताया था कि प्रकाश के पास काफी पैसा है। बड़े पैमाने पर उनका आर्थिक लेन-देन होता है।
वहीं से अतुल के दिमाग में प्रकाश से फिरौती वसूलने का प्लान आया। उसने प्रेक्षा से प्रकाश के बारे में सारी जानकारी इकट्ठा की। फिरौती वसूलने के लिए अपने विश्वासू दोस्तों को प्लान में शामिल किया। आरोपियों ने दक्षिण भारतीय थ्रिलर फिल्में देखकर पूरी तैयारी की। इसके लिए दूसरे के नाम पर सिमकार्ड लिए। चाइनीज कंपनियों के मोबाइल खरीदे।
राव ने बताया कि आरोपी जानते थे कि प्रकाश रोजाना भंडारा से नागपुर अपनी कार से अप-डाउन करते हैं, इसीलिए 17 दिसंबर को आरोपियों ने प्रकाश को केवल डराने के लिए वेलाहरी बाइपास रोड पर रोका। कार के शीशे फोड़ दिए। प्रकाश ने मदद के लिए शोर मचाया तो आरोपी वहां से भाग निकले।
2 दिन बाद आरोपियों ने प्रकाश को फोन किया और पूछा, ‘उस दिन का खेल कैसा लगा, हमें तुझे मारने के लिए 20 लाख की सुपारी मिली है। बचना है तो हमें 50 लाख रुपये दे।’ आरोपियों ने प्रकाश को पैसे लेकर जबलपुर बाइपास रोड महादेव ढाबा के पास बुलाया। प्रकाश ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए प्रकाश को नकली नोटों के साथ वहां भेजा लेकिन आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर बैग लेकर फरार हो गए।
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पुलिस ने नंबर की जांच की लेकिन फोन परिसर में ही लावारिस फेंका गया था। आरोपियों की धमकी के कारण प्रकाश और उनके परिजनों को पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाई गई। 29 दिसंबर को आरोपियों ने दोबारा फोन किया और रकम लेकर इटरनिटी मॉल के पास बुलाया। वहां से ऑटो में सवार होकर वाड़ी रोड पर आने को कहा।
नागपुर पुलिस भी सादी पोशाक में उनका पीछा कर रही थी। पकड़े जाने के डर से आरोपी रकम लेने नहीं आए। दोबारा फोन कर ‘अच्छी फिल्डिंग लगाई तूने, अच्छा खेल खेला, बाकी खेल कल खेलेंगे’ कहकर फोन काट दिया।
राव ने बताया कि आरोपियों का कोई क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं था लेकिन पूरी प्लानिंग किसी पेशेवर मुजरिम की तरह की थी। एक फोन और सिमकार्ड से केवल एक ही बार कॉल किया जा रहा था। ऐसे में पुलिस ने विभिन्न स्थानों से सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली।
तांत्रिक विश्लेषण किया और डम्प डेटा भी खंगाला गया। इससे आरोपियों की जानकारी हासिल हुई। एक साथ आरोपियों को चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा और नागपुर से गिरफ्तार किया गया। न्यायालय ने आरोपियों को 5 दिन की पुलिस हिरासत में रखने के आदेश दिए हैं।