नाले साफ करने के आदेश देती महापौर (सौजन्य-नवभारत)
Mayor Neeta Thakre: आगामी मानसून के मद्देनजर महानगरपालिका ने शहर की नदियों और नालों की सफाई के अभियान को तेज कर दिया। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बुधवार को महापौर नीता ठाकरे, सत्तापक्ष नेता बाल्या बोरकर और मनपा आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने संयुक्त रूप से शहर के विभिन्न हिस्सों का 7 घंटे से अधिक समय तक सघन दौरा कर सफाई कार्यों का जायजा लिया।
महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 30 अप्रैल तक सभी सफाई कार्य पूरे कर लिए जाएं और इसके लिए आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कर्मचारियों और मशीनरी का उपयोग किया जाए। अन्यथा कोताही बरतने पर कार्रवाई होने से संकेत भी दिए।
निरीक्षण के दौरान महापौर ने त्रिमूर्तिनगर में नाले के किनारे स्थित मटन मार्केट के अतिक्रमण को तत्काल हटाने का आदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने गोरेवाड़ा तालाब के पास छठ पूजा स्थल पर सीवर लाइन का पानी रोकने और आवश्यकतानुसार सुरक्षा दीवार बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग को प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। अंबाझरी दहन घाट और विवेकानंद स्मारक के पास नदी में फैली जलकुंभी पर भी उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जल्द समाधान निकालने का आदेश भी दिया।
संगम पूनापुर और महालगांव कापसी क्षेत्र में मानसून के दौरान घरों में पानी घुसने की समस्या को देखते हुए महापौर ने नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) के साथ मिलकर नदी के पात्र को 50 मीटर तक चौड़ा करने के निर्देश दिए हैं। सत्तापक्ष के नेता बाल्या बोरकर ने भी अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागरिकों को बारिश के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
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लक्ष्मीनगर जोन : सहकारनगर घाट, जयताला, नवग्रह मंदिर नाला।
धरमपेठ जोन : अंबाझरी घाट, भरतनगर नाला और मदर डेयरी (WCL) परिसर।
हनुमाननगर जोन : गारगोटी नाला, नरसाला और मानेवाड़ा घाट।
नेहरूनगर जोन : सेंट जेवियर परिसर, दर्शन कॉलोनी और गंगाबाई घाट पुल।
अन्य क्षेत्र : वांजरा, डिप्टी सिग्नल, मिनी मातानगर और वनदेवीनगर।
महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नागरिकों के बीच जागरूकता फैलाएं, ताकि लोग नदी-नालों में कचरा न फेंकें। नरसाला और गारगोटी जैसे क्षेत्रों में पिछले साल ढह गए पुलों का काम भी तुरंत शुरू करने का आदेश दिया गया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी की निकासी को सुचारु बनाना है, ताकि शहर में जलभराव की स्थिति पैदा न हो और नागरिकों को जान-माल का नुकसान न उठाना पड़े।