MIM के कंधे पर मुस्लिम लीग की बंदूक! नया गुट बनाकर कांग्रेस को दी मात, मनोनीत पार्षद की कुर्सी पक्की?

Nagpur Municipal Corporation: नागपुर मनपा में को-आप पार्षद के लिए मुस्लिम लीग और एमआईएम का नया गठबंधन। 10 पार्षदों के साथ वेटेज का खेल। क्या एमआईएम को होगा नुकसान? पढ़ें विश्लेषण।
Muslim League and MIM form a group in Nagpur Municipal Corporation to secure a co-opted corporator seat.
‘को-आप’ चुनाव (फाइल फोटो)
Published on
Updated on

Co-opted Member Election: नागपुर मनपा में मनोनीत पार्षद (को-आप) के लिए आम सभा का आयोजन होने पर भले ही अनिश्चितता हो लेकिन इसके लिए अभी से उठापठक शुरू हो गई है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजनीति के दांवपेच खेलते हुए मुस्लिम लीग ने एमआईएम को साथ में लेकर एक पार्षद बढ़ाने की कवायद पूरी कर ली है।

गत सप्ताह ही मुस्लिम लीग और एमआईएम के बीच विभागीय आयुक्त कार्यालय में गुट स्थापित किया गया जिसमें नेता भी चयन किया गया है। आम चुनावों के परिणामों के अनुसार भाजपा के पास 104 सदस्यों का कुनबा है। इसी तरह से कांग्रेस के पास 35 पार्षद हैं। अब एमआईएम और मुस्लिम लीग दोनों के मिलने से उनके पास 10 पार्षद हो गए हैं। को-आप के लिए तय नियमों के अनुसार अधिकतम 10 सदस्यों की नियुक्ति हो सकती है।

पार्टी के वेटेज के नियम भी हैं तय

नियमों के अनुसार को-आप में किस दल को कितने सदस्य नियुक्त करने के अधिकार होंगे, इसके नियम तय हैं। नियमों के अनुसार इसके लिए स्वतंत्र दल या फिर गुट का वेटेज (पार्टी का बल) निकालना पड़ता है। वर्तमान में भाजपा गुट के पास 104 सदस्य हैं। अत: उनके गुट का वेटेज 6।88 होता है।

चूंकि 6.88 का वेटेज 6.50 से अधिक है, अत: उन्हें 7 सदस्यों के नाम देने का अधिकार होगा। इसी तरह से कांग्रेस और शिवसेना आघाड़ी के 36 पार्षद है जिससे उनके गुट का वेटेज 2.38 होता है। चूंकि 2.38 यह 2.50 से कम है। ऐसे में आघाड़ी को मनोनीत सदस्य के लिए केवल 2 नाम देने का अधिकार होगा।

जानकारों की मानें तो एमआईएम और मुस्लिम लीग अकेले होने पर उनके खाते से कोई भी को-आप सदस्य नहीं बन सकता था किंतु अब दोनों साथ में आने के कारण उनके गुट का वेटेज 0।66 हो रहा है जो 0।50 से अधिक है। अत: उन्हें भी एक सदस्य का नाम देने का अधिकार होगा।

...तो एमआईएम का नुकसान

राजनीतिक जानकारों की मानें तो 16 सदस्यों की स्थायी समिति में भाजपा को 11 सदस्य, कांग्रेस को 4 और अकेली एमआईएम को 1 सदस्य भेजने का अधिकार मिलने जा रहा था। एमआईएम को इसके लिए मुस्लिम लीग की जरूरत नहीं थी। स्थायी समिति के लिए भाजपा गुट का वेटेज 11.01 हो रहा था। इसी तरह से कांग्रेस गुट का वेटेज 3.81 हो रहा था। इसी तरह से एमआईएम का वेटेज 0.63 हो रहा था।

चूंकि यह वेटेज 0.50 से अधिक था, अत: उन्हें भी एक सदस्य स्थायी समिति में भेजने का अधिकार था। राजनीतिक जानकारों की मानें तो मुस्लिम लीग और एमआईएम में गुट स्थापित होने से मुस्लिम लीग का तो एक को-आप बनकर फायदा होगा किंतु गुट नेता होने के कारण यदि स्थायी समिति के लिए भी मुस्लिम लीग के किसी सदस्य को भेजा गया तो इससे एमआईएम का नुकसान होना तय है।

भाजपा के साथ मिलकर खेला

राजनीतिक जानकारों की मानें तो इसके पूर्व मुस्लिम लीग सदन में भारतीय जनता पार्टी के साथ रही है। सत्तापक्ष के साथ रहने के कारण उस समय मुस्लिम लीग का काफी फायदा भी हुआ है। यहां तक कि भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मुस्लिम लीग के स्थानीय नेता के अच्छे संबंध भी हैं, अत: इस बार भी को-आप और स्थायी समिति में पार्षदों को भेजने में भाजपा के साथ मिलकर खेला हो सकता है।

सदन के भीतर नाम देने का अधिकार गुट नेता का होता है। भले ही कोई विरोध भी करें किंतु गुट नेता द्वारा दिए गए नाम पर ही महापौर द्वारा मुहर लगाई जाती है। कुछ जानकारों का मानना है कि महल दंगे के कारण एमआईएम पहली बार महानगरपालिका पहुंची है। दंगे में हुई एफआईआर को लेकर सत्ता का दुरुपयोग होने के आरोप एमआईएम की ओर से लगाए जाते रहे हैं किंतु अब कुछ मामलों में सत्तापक्ष के साथ ही बैठने की नौबत है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com