डीपीसी बैठक का बड़ा फैसला, नागपुर में नए फ्लैटों की रजिस्ट्री पर रोक, बिल्डरों पर सरकार की बड़ी सख्ती
Nagpur DPC Meeting: नागपुर में डीपीसी बैठक के बाद नए फ्लैटों की रजिस्ट्री पर अस्थायी रोक लगा दी गई। बुनियादी सुविधाओं की जांच पूरी होने तक बिल्डरों की परियोजनाओं पर सख्ती बरती जाएगी।
- Written By: अंकिता पटेल
डीपीसी बैठक, चंद्रशेखर बावनकुले,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Infrastructure Compliance Check: नागपुर सोमवार को सिटी के बिल्डरों को उस समय भारी झटका लगा जब नियोजन भवन में हुई डीपीसी की बैठक में नक्शों में बड़ी धांधली की संभावना के चलते पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने बुनियादी सुविधाओं की जांच होने तक नए फ्लैट्स की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी। शहर में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी करने वाले बिल्डरों, पानी की चोरी और सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को लेकर भी प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए।
शहर में ऊंची इमारतों और अपार्टमेंट्स में बिल्डरों की मनमानी पर लगाम कसते हुए पालक मंत्री ने कहा कि जब तक सुविधाओं की जांच नहीं हो जाती तब तक किसी भी नए फ्लैट की रजिस्ट्री न की जाए, कई बिल्डरों ने सीवेज, ड्रेनेज और अग्निशमन जैसी आवश्यक बुनियादी व्यवस्था किए बिना ही इमारतों का निर्माण कर दिया है। इस वजह से स्थानीय सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ा है।
कैसे जारी किया गया ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट ?
बावनकुले ने अधिकारियों से सवाल किया कि सुविधाओं की पूर्ति के बिना ‘ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट’ कैसे जारी किया गया। उन्होंने इसकी सघन जांच कर 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने और जिला उपनिबंधक को अगले आदेश तक फ्लैट्स की रजिस्ट्री रोकने के निर्देश दिए।
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राजस्व विभाग, महानगर पालिका और प्रन्यास की सरकारी जमीनों पर हुए अतिक्रमण को तत्काल प्रभाव से हटाने के आदेश भी दिए। अब अतिक्रमण हटाने की कानूनी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के सहायक आयुक्तों की होगी।
हालांकि 1 जनवरी 2011 से पहले के अतिक्रमणों को सरकारी नियमानुसार छूट दी जाएगी। बैठक के दौरान महापौर नीता ठाकरे ने विशेष रूप से हरपुर क्षेत्र में मौजूद अतिक्रमण को तुरंत हटाने के भी निर्देश दिए।
ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट पर सख्त सवाल
कई मामलों में प्रमाणपत्र मिलने के बाद बिल्डरों द्वारा सीवेज, ड्रेनेज, अग्निशमन और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं नहीं दी गई, जिससे स्थानीय व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। इस पर संज्ञान लेते हुए पालकमंत्री ने निर्देश दिए कि जब तक सभी नियमों के तहत सुविधाएं पूरी नहीं होती, तब तक ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट कैसे जारी हुआ, इसकी गहन जांच की जाए।
उन्होंने जिला उप-निबंधकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि अगले आदेश तक जिले में कहीं भी किसी भी फ्लैट की रजिस्ट्री न हो और सात दिन के भीतर पूरी वस्तुस्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
विधायकों ने अधिकारियों को लिया आड़े हाथ
ऊंची इमारतों और अपार्टमेंट्स को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट देते समय सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखा जाता है। हालांकि कई मामलों में प्रमाणपत्र मिलने के बाद बिल्डरों द्वारा सीवेज, ड्रेनेज, अग्निशमन और अन्य आवश्यक बुनियादी व्यवस्थाएं नहीं की गई, जिससे स्थानीय सुविधाओं पर भारी दबाव बढ़ गया है।
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इस गंभीर मुद्दे को विधायक प्रवीण दटक्के, विधायक डॉ. नितिन राऊत, विधायक विकास ठाकरे, विधायक अभिजीत वंजारी और स्थायी समिति सभापति शिवानी दाणी वखरे ने बैठक में जोरदार तरीके से उठाया, जिस पर पालकमंत्रियों ने अधिकारियों पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की।
