उत्तर नागपुर के साथ हो रहे सौतेला व्यवहार पर विधानसभा में गरजे नितिन राऊत; विकास कार्य के लिए मांगा 550 करोड़

North Nagpur Nitin Raut: उत्तर नागपुर में अधूरे विकास कार्यों और निधि वितरण में देरी का मुद्दा विधानसभा में उठा। विधायक डॉ. नितिन राऊत ने क्षेत्र के लिए ₹550 करोड़ के विशेष पैकेज की मांग की।
Nitin Raut lashes out in the Legislative Assembly over the step-motherly treatment meted out to North Nagpur; seeks ₹550 crore for development works.
विधानपरिषद(सोर्स-सोशल मीडिया)
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North Nagpur Development Fund: नागपुर शहर में विकास कार्यों के लिए स्वीकृत निधि के वितरण में हो रही देरी और उत्तर नागपुर विधानसभा क्षेत्र के साथ किए जा रहे सौतेले व्यवहार को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. नितिन राऊत ने बुधवार को विधानसभा में आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बारिश का मौसम शुरू होने के बावजूद सड़क, सीवरेज और बाढ़ नियंत्रण के काम अधूरे पड़े हैं, जिससे नागरिकों के जीवन पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इसी को लेकर डॉ. राऊत ने उत्तर नागपुर के लिए 550 करोड़ रुपये के अतिरिक्त विशेष पैकेज की मांग की।

उत्तर नागपुर के साथ अन्याय क्यों ?

डॉ. राऊत ने सदन में स्पष्ट कहा कि नागपुर उपराजधानी होने के बावजूद उत्तर नागपुर विकास के मामले में बेहद पिछड़ा हुआ है। यहां की 50 से 60 प्रतिशत आबादी आज भी पानी, सड़क और सीवरेज जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नागपुर महानगर पालिका और नागपुर सुधार प्रन्यास (नासुप्र) द्वारा इस क्षेत्र के साथ हमेशा सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है।

इस अन्याय के विरोध में उन्होंने मनपा आयुक्त के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया है। साथ ही उन्होंने दलित बस्तियों और झुग्गी बस्ती सुधार योजना के लिए तत्काल 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त निधि देने की मांग की।

निधि के अपारदर्शी उपयोग, थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग

राऊत ने कहा कि नागपुर के लिए 1.016.29 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद केवल 346.77 करोड़ रुपये ही वितरित किए गए है, जिसके कारण विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत 2.0 के तहत प्राप्त निधि को अन्यत्र स्थानांतरित कर उत्तर नागपुर के साथ अन्याय किया गया है।

उन्होंने इस निधि के पारदर्शी उपयोग की जांच के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट कराने और पिछले 5 वर्षों के सभी विकास कार्यों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने इंदोरा, जरीपटका, आसीनगर और बिनाकी मंगलवारी क्षेत्र की जर्जर भूमिगत सीवरेज योजना को नए सिरे से बनाने के लिए अमृत 2.0 के स्वीकृत निधि में से कम से कम 40 प्रतिशत राशि आरक्षित रखने की मांग की।

बाढ़ की स्थिति और सरकार देख रही जापान का सपना

वर्ष 2023 की बाढ़ का उल्लेख करते हुए डॉ. राऊत ने प्रशासन की विफलता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नागपुर सुधार प्रन्यास द्वारा आपदा प्रबंधन विभाग को भेजे गए प्रस्ताव को निधि नहीं मिली और मनपा ने भी कोई काम नहीं किया।

तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण द्वारा स्वीकृत नाग नदी और पिवली नदी के प्लान के अनुसार काम हुआ होता तो आज यह स्थिति नहीं आती लेकिन उसे छोड़कर जापान (जेआईसीए) की नदी संरक्षण परियोजना का सपना दिखाकर क्या सरकार शहर का नुकसान करना चाहती है? उन्होंने सरकार से सीधा सवाल किया कि यदि इस वर्ष बारिश के दौरान बाढ़ से जनहानि होती है, तो क्या उसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी सरकार स्वयं स्वीकार करेगी? इस प्रश्न के माध्यम से उन्होंने सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया।

शाहू-फुले-आंबेडकर की विचारधारा वाले राज्य के प्रतिष्ठित महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एमएनएलयू) में पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आरक्षण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पिछड़े वर्ग के छात्रों को मुख्यधारा से अलग-थलग करने और उनके साथ सामाजिक भेदभाव करने के इस बेहद विवादित कृत्य के खिलाफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक डॉ. नितिन राऊत ने बुधवार को विधानमंडल में कड़ा रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी का पर्दाफाश किया।

आरक्षण के 'टुकड़े' कर छात्रों के साथ हो रहा है भेदभाव

सदन में डॉ. राऊत द्वारा पेश की गई जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय ने आरक्षित और अनारक्षित वर्ग के छात्रों के लिए दो अलग-अलग बैच बना दिए हैं। उन्होंने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह पिछड़े वर्ग के छात्रों को सामाजिक भेदभाव की गहरी खाई में धकेलने जैसा है।

उन्होंने प्रशासन पर यह गंभीर आरोप लगाया कि योग्य उम्मीदवार उपलब्ध होने के बावजूद एससी, एसटी, वीजेएनटी और ओबीसी वर्ग के कई उम्मीदवारों को प्रवेश देने से मना किया जा रहा है और उनकी सीटें जानबूझकर खाली रखी जा रही हैं। डॉ. राऊत के मुताबिक, विश्वविद्यालय प्रशासन यह पूरी मनमानी केवल अनारक्षित वर्ग को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए कर रहा है।

न्यायालय और आयोग के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन

इस पूरे मामले में प्रशासनिक लापरवाही और असंवेदनशीलता को उजागर करते हुए डॉ. राऊत ने बताया कि हाई कोर्ट की नागपुर पीट पहले ही विश्वविद्यालय प्रशासन को फटकार लगा चुकी है और आरक्षण नियमों के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया लागू करने के स्पष्ट आदेश दे चुकी है।

इसके अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भी इस मामले में विश्वविद्यालय को नोटिस जारी किया है।

इन सख्त कदमों के बावजूद प्रशासन बार-बार हाई कोर्ट और आयोग के निर्देशों को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने इस कृत्य को लोकतंत्र और संविधान के मूल मूल्यों का सीधा उल्लंघन बताया। यह मुद्दा सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और समाज के सामाजिक सौहार्द से जुड़ा है, इसलिए डॉ. राऊत ने पुरजोर मांग की कि राज्य सरकार इस मामले का तुरंत संज्ञान ले और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे।

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