महाराष्ट्र को MSME से नहीं मिल रहा कोयला, मंत्रालय में अटकी फाइलें! नागपुर के इंडटस्ट्रियल बेल्ट में मची खलबली
Nagpur MSME Coal Crisis: नागपुर के छोटे उद्योगों पर कोयले का संकट! MSMC का कोटा अटका, मंत्रालय में धूल फांक रही हैं फाइलें। वेकोलि से अन्य राज्यों को मिल रहा कोयला, महाराष्ट्र पीछे।
- Written By: प्रिया जैस
कोयला (सौजन्य-सोशल मीडिया)
MSMC Coal Supply Delay: नागपुर में कोयले की बढ़ती कीमतों ने उद्यमियों से लेकर छोटे कारोबारियों तक को परेशान करना शुरू कर दिया है। भविष्य को देखते हुए लोग और भी डरे हुए हैं। युद्ध का संकट नहीं टलता है तो कोयले पर निर्भरता बढ़ना तय है। ऐसे में लोग कोयले की तरफ दौड़ रहे हैं, ताकि स्टाक रहे और उनका कारखाना चलता रहे। इसी को देखते हुए उद्योग संगठन भी सक्रिय हो गए हैं।
संगठन के प्रमुखों का कहना है कि स्थानीय उद्यमियों के लिए एक और अलग से कोटा तय किया जाना चाहिए और कीमतों पर भी अंकुश लगाया जाना चाहिए, ताकि स्थानीय उद्योग को उचित मात्रा में और उचित कीमत पर कोयला उपलब्ध हो सके। सबसे बड़ी बात यह है कि वेकोलि से कई राज्यों के माइनिंग विभाग द्वारा लिंकेज के तहत कोयला उठाया जा रहा है, जबकि महाराष्ट्र ही अपना लिंकेज कोयला नहीं उठा रहा है। दूसरे राज्य आगे हो गए हैं, जबकि राज्य इसमें दिलचस्पी नहीं ले रहा है।
उद्यमियों का कहना है कि कोयले की कमी को देखते हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश के उद्यमी बोली लगाने लगे हैं। ऊंची कीमतों में कोयला लेने से इन्हें परहेज नहीं है। ऐसे में स्थानीय एमएसएमई सेक्टर के उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी प्रकार वेकोलि से गुजरात, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश का लिंकेज है और वे अपना कोयला उठा रहे हैं। बाकायदा वे अपने कोटे का पूरा का पूरा कोयला यहां से ले जाकर अपने उद्योगों को सप्लाई कर रहे हैं।
सम्बंधित ख़बरें
कोटेदारों ने की मुख्य सचिव से शिकायत, सड़े गले चावल कैसे बांटे साहब, इसे जानवर ही खा सकते हैं, गरीब लोग नहीं
टमाटर के तीखे तेवर हुए नरम! 60 रूपए से घटकर 20 रूपए किलो पर आया दाम; नागपुर के आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
नागपुर में HSRP प्लेट पर आरटीओ का महा-अभियान; पहले ही दिन हजारों वाहनों की चेकिंग, सैकड़ों का कटा चालान
समय पर कर्ज चुकाने का मिला इनाम! नागपुर विभाग में किसानों को 53 करोड़ की ब्याज माफी, फसल ऋण हुआ ब्याज-मुक्त
एमएसएमसी रह गया पीछे
दूसरी तरफ महाराष्ट्र राज्य माइनिंग कॉरपोरेशन (एमएसएमसी) को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि राज्य के छोटे-छोटे उद्योगों को कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करे। इसके लिए बाकायदा प्रति माह 40,000 टन कोयले का कोटा भी तय किया गया। पिछले वर्ष जब सब कुछ सामान्य चल रहा था तब कोयले का कोटा लिया गया और उद्योगों को राहत पहुंचाई गई लेकिन जब युद्ध के कारण कोयले का संकट खड़ा है तब सरकार हाथ पीछे खींच रही है।
यह भी पढ़ें – हिंगना बनेगा मध्य भारत का ‘बिजनेस हब’! न्यू नागपुर के लिए ई-टेंडर जारी, जानें कैसा होगा आपका नया शहर
सूत्रों ने बताया कि लिंकेज का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास काफी पहले भेजा गया था लेकिन राज्य सरकार के मंत्री और अधिकारी इस पर रुचि नहीं ले रहे थे। अब आलम यह है कि विपरीत परिस्थिति में छोटे उद्योगों एमएसएमई को कोयला नहीं मिल रहा है।
फाइलें लटक गईं, भट्ठी बुझने की कगार पर
उद्यमियों का कहना है कि प्रशासनिक निर्णय समय पर नहीं लेने के कारण फाइलें टेबल टू टेबल घूम रही हैं। अधिकारियों और नेताओं की नीति समझ से परे है। उनकी इस नीति ने छोटे उद्यमियों को संकट में डाल दिया है। कई उद्योग की भट्ठियां बुझने की कगार पर हैं।
उनका कहना है कि अगर एमएसएमसी से कोयला मिलता तो सस्ती दरों पर उपलब्ध होता। आज बाजार से लोगों को ब्लैक में लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि बाजार में कोयले की ब्लैक मार्केटिंग चरम पर पहुंच चुकी है।
वेकोलि फिक्स करे कोटा
संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वेकोलि को भी चाहिए कि स्थानीय उद्योगों के लिए अलग से कोटा तय करे, ताकि उन्हें कोयला मिलने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। खासकर विपरीत परिस्थिति में यह काफी अनिवार्य हो गया है।
