पुर्वेश दुरगकर अंतिम संस्कार (सौजन्य-नवभारत)
Purvesh Duragkar Funeral Nagpur: सैन्य अभ्यास के दौरान भारतीय वायु सेना के सुखोई लड़ाकू विमान हादसे में शहीद हुए शहर के सपूत फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुर्वेश दुरगकर का शव सैन्य सम्मान के साथ नागपुर के न्यू सुभेदार लेआउट स्थित निवास स्थान पर पहुंचा। बेटे को तिरंगे से लिपटे ताबूत में देख पूरा परिवार सिहर उठा। एक तरफ जहां पुर्वेश दुरगकर अमर रहें के नारे लग रहे थे, वहीं दूसरी तरफ घर से मां और बहन की रोती-बिलखतीं चीखें गूंज रही थीं।
परिसर में मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं और पुर्वेश के प्रति सम्मान था। पुर्वेश की अंतिम यात्रा में शहर भर से लोग शामिल हुए। पुर्वेश की शहादत की खबर सुनकर मां को गहरा सदमा पहुंचा, लेकिन अंतिम समय तक आंसू नहीं निकले, लेकिन जब शव मानेवाड़ा घाट पहुंचा तो मां की ममता का बांध टूट पड़ा।
बस चाह थी कि बेटा उठकर एक बार गले लगा ले। परिजन और सैन्य अधिकारियों ने ढांढस बंधाया और शनिवार शाम पुर्वेश को पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के समय ‘पूर्वेश अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के गगनभेदी नारों से वातावरण गूंज उठा।
28 वर्षीय फाइटर पायलट पूर्वेश के निधन का असहनीय दुख सबसे ज्यादा मां संध्या को ही होगा। पुर्वेश को विदाई देते समय उन्होंने मां-बेटे के बीच हुई कई बातों को दोहराया। पुर्वेश कहता था कि मुझे सेना का बहुत बड़ा अफसर बनना है। शुरुआत से ही पुर्वेश का सेना के प्रति बेहद सम्मान था। कड़ी मेहनत करके बेटा वायु सेना में अफसर बना।
पुर्वेश दुरगकर के परिवार को तिरंगा सौंपते सैन्य अधिकारी (सौजन्य-नवभारत)
लगभग हर दूसरे दिन पुर्वेश की माता-पिता से बातचीत होती थी, लेकिन उन्होंने सोचा नहीं था कि बेटा इस तरह तिरंगे में लिपटा आएगा। पुर्वेश की बहन सायली अमेरिका में रहती है। शनिवार दोपहर को सायली भी नागपुर आ गई। बेटी को देखते ही मां चीख उठी। अब तेरे साथ मस्ती और परेशान कौन करेगा कहकर बेटी को गले लगा लिया। इस घटना से पूरे नागपुर में शोक की लहर है।
शनिवार को कोलकाता होते हुए पुर्वेश का शव नागपुर के सोनेगांव एयर फोर्स स्टेशन पहुंचा। पुर्वेश के साथ तैनात साथी भी शव के साथ नागपुर पहुंचे। फूले से सजे सेना के ट्रक में पार्थिव लेकर सैन्य अधिकारी घर पहुंचे। पुर्वेश को कंधे पर लेते ही साथ काम करने वाले सैन्य अधिकारी की आंखें भी नम हो गईं।
देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले पुर्वेश दुरगकर के अंतिम दर्शन को शहर भर से नागरिक परिसर में इकट्ठा हुए। पुलिस और सैन्य अधिकारियों ने पार्थिव के ट्रक को एस्कार्ट किया। पीछे था नागरिकों का रेला। हर कोई पुर्वेश अमर रहें के नारे लगा रहा था।
राज्य शासन की ओर से जिलाधिकारी विपिन इटनकर ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस अधिकारी और जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। अंतिम संस्कार से पूर्व वायु सेना के दल ने पूर्वेश को विशेष सलामी दी। जवानों की टुकड़ी ने आकाश में बंदूक की फैरी झोंककर अपने साथी को अंतिम सम्मान दिया।
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अंत्येष्टि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सैन्य परंपरा के अनुसार पूर्वेश के पार्थिव पर लिपटा तिरंगा ध्वज, पी-कैप और फोटो सम्मानपूर्वक उनके परिजनों को सौंपा गया। तिरंगा ग्रहण करते ही परिवार के सदस्यों का धैर्य टूट गया और उनकी आंखों से बहते आंसुओं ने वहां मौजूद लोगों को भी भावुक कर दिया।
देश की सेवा के लिए समर्पित एक युवा योद्धा को विदाई देते समय पूरा नागपुर शोक में डूबा दिखाई दिया। जिस उम्र में युवा अपने सपनों को आकार देते है, उसी उम्र में पूर्वेश ने देश सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे दिया। उसकी शहादत से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक फैला हुआ है।
शहर के सपूत ने कर्तव्य निभाते हुए अपना प्राण न्योछावर किया। एक तरफ जहां अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए नागरिकों का हुजूम उमड़ा वहीं शहर के हैवीवेट मंत्रियों ने परिवार के दुख में सहभागी होने का भी कष्ट नहीं लिया। शहर में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए 4 मंत्री नागपुर में ही थे लेकिन कोई भी दुरगकर परिवार के घर नहीं आया। यह बात सभी को खटक रही थी। नागरिकों में यह चर्चा का विषय बन गया।