महाराजबाग जू (सौजन्य-सोशल मीडिया)
PDKV Nagpur Zoo Crisis: नागपुर में दर्शनीय स्थल महाराजबाग चिड़ियाघर मैनपॉवर की कमी से जूझ रहा है। हर वर्ष 2 करोड़ की कमाई करने वाला चिड़ियाघर अपना खर्च खुद ही निकाल लेता है। इसके बाद भी पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गंभीरता नहीं बरती जा रही है। स्थिति यही रही तो चिड़ियाघर को दर्शकों के लिए बंद करने की नौबत आ सकती है।
चिड़ियाघर में सफाई कर्मचारियों की गंभीर कमी के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। इस संबंध में प्रभारी अधिकारी ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र भेजकर त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है। पत्र में बताया गया है कि ठेकेदारी या बाह्य एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव कई महीनों से लंबित पड़ा है।
कर्मचारियों की कमी के चलते प्राणी संग्रहालय में स्वच्छता, रखरखाव और समुचित प्रबंधन करना बेहद कठिन हो गया है, जिससे वन्यजीवों और दर्शकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। महाराजबाग प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते आवश्यक निर्णय नहीं लिया गया तो सुरक्षा के मद्देनजर प्राणी संग्रहालय को अस्थायी रूप से दर्शकों के लिए बंद करने की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि महाराजबाग के संचालन और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव लंबे समय से लंबित हैं। इनमें प्राणी संग्रहालय को स्वावलंबी बनाने के लिए स्वतंत्र सोसायटी गठन का प्रस्ताव, कर्मचारियों की नियुक्ति, पिंजरों के चारों ओर सुरक्षात्मक जाली लगाने, बाघ के क्षतिग्रस्त बाड़े की मरम्मत तथा वर्ष 2024–25 की वार्षिक रिपोर्ट से जुड़े भुगतान जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
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प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि महाराजबाग चिड़ियाघर की वार्षिक आय 2 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि इसके संचालन और प्रबंधन पर कुल खर्च लगभग 1.30 करोड़ रुपये ही आता है। ऐसे में विश्वविद्यालय पर कोई अतिरिक्त आर्थिक भार भी नहीं पड़ता। यदि लंबित प्रस्तावों पर शीघ्र निर्णय लिया जाता है तो न केवल महाराजबाग का सुचारु संचालन सुनिश्चित होगा, बल्कि विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और गौरव में भी वृद्धि होगी।