नागपुर में बनेंगे ड्रोन के इंजन, सोलर का CSIR के साथ करार, स्वदेशी UAV इंजन प्रोडक्शन की होगी शुरुआत
Nagpur Drone Engine: नागपुर में जल्द ही कामिकेज ड्रोन के लिए स्वदेशी वांकेल इंजन तैयार होंगे। SDAL और CSIR के करार के साथ UAV इंजन निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
- Written By: प्रिया जैस
ड्रोन (सौजन्य-IANS)
SDAL CSIR Agreement: मानव रहित हवाई वाहन -लोइटरिंग मुनिशन (यूएवी-एलएम) सिस्टम जो कामिकेज ड्रोन के रूप में कार्य करते हैं, के लिए स्वदेशी अगली पीढ़ी के इंजन जल्द ही नागपुर में विकसित किए जाएंगे। सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (एसडीएएल) ने सरकारी निकाय वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के सहयोग से यूएवी के लिए वांकेल इंजन बनाने का सौदा हासिल किया है।
यह परियोजना यूएवी इंजन से संबंधित सीएसआईआर के लिए अपनी तरह का पहला प्रयास होगा क्योंकि देश में यूएवी का उत्पादन शुरू होने के बावजूद इंजन के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।
इंजन और सिस्टम की विशिष्टताएं
यह इंजन 150 किलोग्राम वर्ग के यूएवी-एलएम के लिए डिजाइन किया गया है जिसकी व्यापक रेंज 900 किलोमीटर और उड़ान सहनशक्ति 6 से 9 घंटे है। इंजन को सीएसआईआर की नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरी (एनएएल) द्वारा डिजाइन किया गया है। इंजन को सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन द्वारा मंजूरी मिल गई है।
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प्रतिस्पर्धा : एसडीएएल ने इस सौदे को हासिल करने के लिए 2 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बहुराष्ट्रीय निगमों को पछाड़ दिया।
स्वदेशी सामग्री : इस परियोजना में उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री शामिल है जिसमें उभरती परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उन्नत पेलोड भी शामिल हैं।
सेवा सीमा : 900 किलोमीटर की रेंज के अलावा इसकी सेवा सीमा 5 किलोमीटर होगी।
स्टील्थ और क्षमताएं : यूएवी में बहुत कम रडार क्रॉस-सेक्शन है जो इसकी स्टील्थ विशेषताओं को बढ़ाता है और यह जीपीएस-रहित वातावरण में भी काम कर सकता है।
पेलोड : यह प्लेटफॉर्म एक एआई-सक्षम ईओ-आईआर पेलोड से लैस है जो अत्याधुनिक डिटेक्शन, रिकग्निशन और आइडेंटिफिकेशन क्षमताएं प्रदान करता है।
समझौते पर हस्ताक्षर और भविष्य की योजनाएं
एसडीएएल और सीएसआईआर ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह की उपस्थिति में बेंगलुरु में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। मंत्री ने इस कदम को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। एसडीएएल पहले से ही नागास्त्र लोइटरिंग मुनिशन का निर्माण करता है जिसे ऑपरेशन सिंदूर में तैनात किया गया था। स्वदेशी इंजन पर आधारित सिस्टम एक और कदम आगे होगा।
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कंपनी ने मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (एमएएलई) यूएवी के लिए भी अनुरोध जानकारी (आरएफआई) का जवाब दिया है जिसका उपयोग निगरानी उद्देश्यों के लिए किया जाता है। एसडीएएल ने हाल ही में मिहान-एसईजेड में भी जमीन अधिग्रहित की है, जहां वह नई पीढ़ी के युद्ध के लिए आवश्यक उपकरणों के हिस्से के रूप में रोबोटिक्स आधारित सिस्टम विकसित करने की योजना बना रही है।
