Nagpur High Court News: नागपुर स्थित खामला की जेतवन को-ऑपरेटिव सोसायटी की ओर से दायर रिट याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें सोसायटी के एक सदस्य को अपने मुकदमे में प्लॉट नंबर संशोधित करने की अनुमति दी गई थी।
यह फैसला न्यायमूर्ति एम.डब्ल्यू. चांदवानी ने सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि मुकदमे के दौरान कोई नई जानकारी सामने आती है, तो कानून के तहत संशोधन की अनुमति देना उचित है।
यह मामला वर्ष 2007 से लंबित है, जब शंकर गुंडेराव ताभाने ने को-ऑपरेटिव कोर्ट, नागपुर में विवाद (डिस्प्यूट नंबर 274/2007) दायर किया था। उन्होंने मौजा खामला के खसरा नंबर 58/1 स्थित प्लॉट नंबर 69 के लिए सेल डीड निष्पादित करने की मांग की थी।
मुकदमे के दौरान सामने आया कि सोसायटी ने 17 जुलाई 2023 को नागपुर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट (NIT) को भेजे पत्र में संबंधित सदस्य को प्लॉट नंबर 69 के बजाय प्लॉट नंबर 49 आवंटित होने की जानकारी दी थी। इसके बाद ताभाने ने अपने मूल आवेदन में संशोधन की मांग की, जिसे निचली अदालत ने मंजूरी दे दी।
सोसायटी ने इस आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि साक्ष्य पेश होने के बाद संशोधन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि नई जानकारी सामने आने पर संशोधन उचित है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि नागरिक प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 6, नियम 17 के तहत संशोधनों के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।