देश के बाकी AIIMS ठीक, तो नागपुर में ही दिक्कत क्यों? एम्स की हालत पर हाई कोर्ट ने लिया संज्ञान

AIIMS Nagpur High Court News: नागपुर के मिहान परिसर में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की बदहाली पर बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने कड़ा संज्ञान लिया है।
Nagpur High Court expresses outrage over poor health services and 137 vacant posts at AIIMS Nagpur.
नागपुर एम्स पर हाई कोर्ट सख्त (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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AIIMS Health Services Nagpur Issues: नागपुर हाई कोर्ट ने वर्धा रोड स्थित मिहान परिसर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मरीजों को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं के गिरते स्तर पर बुधवार को गहरी नाराजगी व्यक्त की। न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से सवाल किया कि जब देश के अन्य एम्स संस्थानों में मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है, तो केवल नागपुर में ही इस तरह की अड़चनें क्यों पैदा हो रही हैं?

अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवा देना संस्थान की जिम्मेदारी है लेकिन उचित उपचार उपलब्ध न होने के कारण कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का विकल्प चुनना पड़ रहा है। केंद्र सरकार की वकील मुग्धा चांदुरकर को स्वयं नागपुर एम्स का दौरा कर वहां की परिस्थितियों का जायजा लेने के निर्देश भी दिए। साथ ही केंद्र सरकार को 2 सप्ताह के भीतर इस मामले पर विस्तृत जवाब पेश करने को कहा गया।

137 पद पड़े हैं रिक्त

सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में यह बात आई कि एम्स नागपुर में स्वीकृत 373 पदों में से 137 पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। हाई कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि प्रोफेसरों और अन्य कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है। एम्स जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में इतने बड़े पैमाने पर पदों का खाली होना एक गंभीर विषय है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है। इस प्रकरण में वरिष्ठ अधि. जुगलकिशोर गिल्डा को ‘न्याय मित्र’ नियुक्त किया गया है। साथ ही, वकील शौनक कोठेकर को 2010 के नियमों के अनुसार विधिवत जनहित याचिका तैयार कर रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया गया।

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