Nagpur High Court News: नागपुर सिटी में नियमों को ताक पर रखकर बेतरतीब तरीके से बनाए गए सीमेंट रोड एवं इससे बारिश के दौरान होने वाली परेशानी को लेकर जनमंच की ओर से हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि भले ही प्रशासन जलभराव रोकने के लिए दिए गए समाधानों में विशेष रूप से सबमर्सिबल पंप के उपयोग को उचित करार दे रहा हो लेकिन जलजमाव की स्थिति में यह कारगर साबित होने पर आशंका है।
प्रशासन द्वारा गत समय दिए गए हलफनामा के जवाब में शपथपत्र तैयार किया गया है। उसे प्रेषित करने के लिए समय देने का अनुरोध अदालत से किया गया। सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश निवेदिता मेहता ने समय प्रदान कर सुनवाई स्थगित कर दी।
मनपा के शपथपत्र में आश्वासन दिया गया है कि आगामी मानसून सत्र के दौरान सिटी के किसी भी हिस्से में जलभराव नहीं होगा। मनपा ने इस समस्या से निपटने के लिए निम्नलिखित प्रस्तावित उपायों की जानकारी दी। मनपा ने बताया कि उचित स्थानों पर साइड ड्रेन नालियों का निर्माण किया जाएगा।
जहां नालियां नहीं बन पाएंगी वहां पानी निकालने के लिए सबमर्सिबल पंप लगाए जाएंगे। सड़क के डिजाइन के अनुसार स्टॉर्म वाटर ड्रेन की ऊंचाई बढ़ाई जाएगी। सीमेंट सड़कों के कारण जिन घरों में पानी घुसने की समस्या है वहां रीचार्ज पिट और विशेष चेंबर बनाए जाएंगे। मानसून के दौरान 24 बाय 7 इमरजेंसी कंट्रोल रूम और प्रत्येक जोन में रिस्पॉन्स सिस्टम तैयार रहेगा।
अदालत का मानना था कि केवल सबमर्सिबल पंपों के भरोसे रहना व्यावहारिक नहीं है। सिटी में कई स्थानों पर पानी जमा होता है, ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पंपों की व्यवस्था करना और उन्हें एक साथ तैनात करना एक बड़ी चुनौती होगी। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मनपा ऐसे स्थायी समाधान खोजे जिससे मानवीय हस्तक्षेप के बिना पानी अपने आप निकल जाए।
अदालत ने मनपा को सख्त हिदायत दी है कि जल निकासी से संबंधित सभी कार्यों को 31 मई 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। यही निर्देश एनआईटी को भी अपने अधिकार क्षेत्र के कार्यों के लिए दिए गए हैं।