

Nagpur Utility Corridor Project: नागपुर के प्रस्तावित 173 किलोमीटर लंबे गोल्डन रिंग रोड यानी तीसरे आउटर रिंग रोड को लेकर एनएमआरडीए ने प्रक्रिया तेज कर दी है। व्यवहार्यता अध्ययन और डीपीआर तैयार करने के लिए जल्द सलाहकार एजेंसी नियुक्त होने की संभावना है।
खास बात यह है कि रोड के साथ डेडिकेटेड यूटिलिटी कॉरिडोर, 8 कमर्शियल हब और आधुनिक टोल सिस्टम विकसित करने की योजना है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जा रहे 173 किलोमीटर लंबे ‘गोल्डन रिंग रोड’ यानी तीसरे आउटर रिंग रोड को लेकर एनएमआरडीए ने काम तेज कर दिया है।
नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) की ओर से परियोजना के व्यवहार्यता अध्ययन और विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रोजेक्ट का पूरा रोडमैप तैयार करने के लिए जल्द सलाहकार एजेंसी नियुक्त किए जाने की संभावना है।
इस रिंग रोड को सामान्य बाइपास के बजाय आत्मनिर्भर ‘इकोनॉमिक कॉरिडोर’ के रूप में विकसित करने की योजना है। इसके वित्तीय मॉडल में डेडिकेटेड यूटिलिटी कॉरिडोर को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
हाईवे के रोड डिवाइडर और राइट ऑफ वे के भीतर गैस पाइपलाइन, पानी की मुख्य लाइन, बिजली ट्रांसमिशन केबल और टेलीकॉम कंपनियों के ऑप्टिकल फाइबर केबल के लिए विशेष जगह निर्धारित की जाएगी। इस यूटिलिटी स्पेस को सरकारी और निजी कंपनियों को लंबी अवधि के लिए लीज या किराये पर देकर एनएमआरडीए को नियमित राजस्व मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा कॉरिडोर के साथ सोलर पैनल और पवन ऊर्जा टरबाइन लगाने तथा स्वच्छ बिजली का व्यावसायिक उपयोग करने की संभावनाएं भी योजना में शामिल हैं।
सिर्फ टोल टैक्स पर निर्भर रहने के बजाय इस परियोजना में कमर्शियल मोनेटाइजेशन पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत 8 नोडल डेवलपमेंट पॉकेट्स विकसित करने की योजना है।
इनमें आईटी व इन्फोटेक पार्क, लॉजिस्टिक और वेयरहाउसिंग पार्क, इंडस्ट्रियल नोड्स, एग्रो-प्रोसेसिंग हब, हेल्थ व मेडिकल सिटी, एजुकेशनल हब, रिसॉर्ट्स और स्मार्ट सिटी नोड्स शामिल होंगे।
हर 50 किलोमीटर पर वे-साइड एमेनिटीज विकसित करने की योजना है। यहां पेट्रोल-डीजल और ईवी चार्जिंग स्टेशन, फूड प्लाजा, मोटल, रेस्ट एरिया और इमरजेंसी ट्रॉमा सेंटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के ड्रीम प्रोजेक्ट में टोल प्लाजा पर वाहनों की कतार कम करने के लिए आरएफआईडी आधारित टोल सिस्टम और क्यूइंग थ्योरी का इस्तेमाल करने की योजना है। ओवरलोडिंग पर नजर रखने के लिए वे-इन-मोशन तकनीक भी प्रस्तावित है। योजना के अनुसार वाहनों को बिना रुके औसतन करीब 4 सेकंड में टोल क्लीयरेंस मिल सकेगा।
टोपोग्राफिक सर्वे के लिए सामान्य ड्रोन के बजाय उच्च सटीकता वाली एरियल LiDAR तकनीक का इस्तेमाल प्रस्तावित है। विमान या हेलिकॉप्टर के नीचे लगे लेजर स्कैनर की मदद से पूरे 173 किमी मार्ग का 3D डिजिटल मैप तैयार किया जाएगा।
तीसरे आउटर रिंग रोड पर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट पार्क के साथ ट्रकों के लिए ट्रक ले-बाय विकसित किए जाएंगे। मुंबई शहर, हैदराबाद, जबलपुर और अमरावती की दिशा से आने वाले भारी वाहन शहर में प्रवेश किए बिना अपने गंतव्य की ओर जा सकेंगे। इससे नागपुर शहर के अंदर भारी वाहनों का दबाव, दुर्घटनाओं और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
एनएमआरडीए आयुक्त संजय मीणा के मार्गदर्शन में परियोजना का खाका तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।