नागपुर मेडिकल कॉलेज अव्यवस्था( सोर्स: सोशल मीडिया )
Nagpur Government Hospital Negligence: नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में इन दिनों कुछ वरिष्ठ डॉक्टरों से लेकर कनिष्ठ डॉक्टरों तक की ‘कामचोरी’ बढ़ गई है। कई डॉक्टर तो ‘मेहमान कलाकार’ की तरह विभाग में आते हैं। वहीं कुछ तो कई दिनों से ही ‘गायब’ भी बताए जा रहे हैं।
इसके बावजूद अधिष्ठाता द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। इससे उन डॉक्टरों में असंतोष पनप रहा है जो अपनी सेवा के प्रति सजग, सतर्क और समयबद्ध हैं। वर्तमान में मेडिकल की ओपीडी प्रति दिन करीब 3,000 तक पहुंच गई है।
सुबह से ही मरीजों की कतार लगती है। ओपीडी का समय सुबह 9 से दोपहर 2 बजे तक होता है लेकिन कई विभागों में वरिष्ठ और कनिष्ठ डॉक्टर समय पर नहीं आते। इस हालत में निवासी डॉक्टर मोर्चा संभाले रहते हैं।
कई बार मरीजों को वरिष्ठ डॉक्टरों की सलाह के रुकना पड़ता है। प्रशासन ने कामचोरी रोकने के लिए बायोमेट्रिक्स हाजिरी का नियम बनाया है, कामचोरी करने वालों ने इसका भी तोड़ खोज निकाला है।
हाजिरी लगाने के बाद कुछ देर रुककर कई डॉक्टर गायब हो जाते हैं। बताया जाता है वे शासकीय कार्यालयीन समय में भी प्राइवेट प्रैक्टिस में व्यस्त रहते हैं।
यह अव्यवस्था वर्षों से जारी है। इसके बाद भी सुधार नहीं हो रहा है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। वहीं दूसरी और कुछ डॉक्टर समय के पाबंद भी हैं। ओपीडी हो या ओटी उनकी उपस्थिति नियमित होती है।
वरिष्ठ डॉक्टरों की गैर मौजूदगी में निवासी डॉक्टरों पर काम का दबाव बढ़ रहा है। ओपीडी के बाद वाहाँ में भी सेवा देना पड़ता है। यदि कभी कोई भूल हो जाये तो उन्हें ताने भी सुनना पड़ता है। हालांकि प्रशासन ने निवासी डॉक्टरों के काम के घंटे तय किए हैं लेकिन यह अब तक केवल कागजों तक ही सीमित है।
ओपीडी के दौरान अधिष्ठाता द्वारा नियमित राउंड व्यवस्था को बनाए रखने में मददगार होता है। जानकार बताते हैं कि नियमित राउंड की परंपरा अब लगभग बंद हो गई है। यही वजह है कि लापरवाही को बढ़ावा मिल रहा है।
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मेडिकल में केवल विदर्भ ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और तेलंगाना के भी मरीज इलाज के लिए आते है। कई बार ओपीडी में जांच के दौरान मरीजों को टेस्ट की सलाह दी जाती है।
यदि डॉक्टर देरी से आये तो टेस्ट करते-करते दोपहर 2 बज जाते हैं। इस हालत में मरीजों को दोबारा आना पड़ता है। बाहर गांव से आने वाले मरीजों के लिए यह कष्टदायी होता है। यदि अधिष्ठाता द्वारा नियमित राउंड हो तो कुछ हद तक व्यवस्था में सुधार लाया जा सकता है।