विवि फिल्म फेस्टिवल में रणदीप हुड्डा बने आकर्षण (सौजन्य-नवभारत)
Randeep Hooda Nagpur Visit: अपने गांव, उसकी कहानियों, इतिहास और संस्कृति को फिल्मों के माध्यम से दुनिया के सामने लाने का आह्वान फिल्म अभिनेता रणदीप हुड्डा ने किया। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी विकास विभाग और नागपुर चलचित्र फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नागपुर फिल्म महोत्सव का उद्घाटन शनिवार को गुरुनानक भवन में हुआ।
इस अवसर पर हुड्डा ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में राज्य मंत्री एड. आशीष जायसवाल, विद्यार्थी विकास विभाग के संचालक डॉ. विजय खंडाल, भारतीय चित्र साधना के सचिव अतुल गंगवार, स्तंभकार एवं लेखक अनंत विजय, फाउंडेशन के अजय राजकारणे उपस्थित थे।
रणदीप हुड्डा ने कहा कि रचनात्मक सोच के साथ फिल्म बनाना साहसिक कार्य है और इस महोत्सव में बड़ी संख्या में फिल्मों की भागीदारी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने अपनी फिल्म रंगरसिया में राजा रवि वर्मा की भूमिका निभाने के अनुभव साझा किए। उन्होंने यह भी बताया कि विनायक दामोदर सावरकर की भूमिका निभाना आसान नहीं था।
उनके जीवन पर आधारित अध्ययन और पढ़ाई के बाद ही उन्होंने यह भूमिका स्वीकार की, ताकि सावरकर के विचार देश ही नहीं, बल्कि विश्व तक पहुंच सकें। युवाओं से संवाद करते हुए रणदीप हुड्डा ने कहा कि यदि वे अभिनेता नहीं होते, तो सेना में जाते या घुड़सवारी के अपने शौक को आगे बढ़ाते। उन्होंने बॉलीवुड और हॉलीवुड के अंतर पर भी प्रकाश डाला और कहा कि अमेरिकी फिल्मों में देशभक्ति को लगातार प्रमुखता दी जाती है, जबकि भारतीय सिनेमा में इस दिशा में और प्रयास की आवश्यकता है।
304 – फिल्में महोत्सव में आईं
205 – महाराष्ट्र की
92 – फिल्में विदर्भ-नागपुर की
राज्य मंत्री आशीष जायसवाल ने कहा कि युवाओं को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आगे आने की आवश्यकता है। स्थानीय मंच के अभाव में विदर्भ के कलाकारों को मुंबई में संघर्ष करना पड़ता है। रामटेक में कवि कुलगुरु कालिदास फिल्म सिटी स्थापित करने का निर्णय सरकार द्वारा लिया गया है, जिससे स्थानीय कलाकारों को बड़ा अवसर मिलेगा।
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स्तंभकार अनंत विजय ने कहा कि फिल्म महोत्सव कलाकारों के लिए एक बड़ा मंच है। स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक सिनेमा के सामाजिक प्रभाव को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, लेकिन अब इस दिशा में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। महोत्सव में देश के 85 शहरों से 22 भाषाओं में कुल 304 फिल्में प्राप्त हुई हैं। इनमें महाराष्ट्र की 205 तथा विदर्भ-नागपुर क्षेत्र की 92 फिल्मों का समावेश है, जिनमें बड़ी संख्या में नए फिल्म निर्माताओं की भागीदारी है। कार्यक्रम का संचालन उज्ज्वला लोणकर ने किया।