
नागपुर निकाय चुनाव (सौजन्य-सोशल मीडिया)
AB form distribution in Nagpur: नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख की सुबह उन निर्दलीयों के दरवाजे पर कुछ पार्टियां अपना-अपना एबी फॉर्म लेकर पहुंचीं जिन्हें अचानक उम्मीदवार तय करने थे लेकिन कुछ ने लॉटरी लगी समझकर स्वीकार कर लिया तो कुछ ने अपनी मूल पार्टी से टिकट कटने का बदला लेने और अपने प्रभाग में अपनी ताकत आजमाने के लिए निर्दलीय ही मैदान में डटे रहने का निर्णय लिया।
30 दिसंबर को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि थी और समय दोपहर 2 बजे तक का ही था। जैसे ही महायुति और महाविकास आघाड़ी टूटी तो सहयोगी दलों खासकर राकां अजीत पवार और राकां शरद पवार पार्टी में अफरातफरी मच गई। दोनों दलों को उम्मीदवार उतारने थे।
हालांकि पहले ही इच्छुक उम्मीदवारों के इंटरव्यू लेकर सूची तैयार कर ली गई थी लेकिन जीत सकने वाले या फिर मूल पार्टियों के अधिक से अधिक वोट काट सकने वाले उम्मीदवारों को एबी फॉर्म देने की होड़ मची थी। उनके पदाधिकारी एबी फॉर्म लेकर अच्छे उम्मीदवारों के घरों तक पहुंच रहे थे।
भाजपा व कांग्रेस के टिकट नहीं मिलने से नाराज और बागी उम्मीदवारों को लपकने का प्रयास दोनों राष्ट्रवादी, बसपा, एमआईएम, मुस्लिम लीग आदि द्वारा किया गया। कुछ ने अपने इलाके में सामाजिक कार्य में सक्रिय युवाओं को लपका। राकां शरद पवार के उम्मीदवारों की सूची में एक नाम ऐसा शामिल किया गया जो कांग्रेस का अच्छा कार्यकर्ता रहा है।
उसे कांग्रेस उम्मीदवारी का प्रबल दावेदार समझा जा रहा था लेकिन टिकट कट गई। उसके अनुसार राकां एसपी सहित बसपा व अन्य कुछ पार्टियों के पदाधिकारी उसके पास अपना एबी फॉर्म लेकर आए लेकिन उसे अपने दम पर ही अपनी पकड़ साबित कर कांग्रेस के दिखाना है, इसलिए उनके एबी फार्म लेने से इनकार कर दिया और निर्दलीय लड़ने का फैसला लिया।
ऐसे अनेक उम्मीदवारों के नाम अचानक ही इन पार्टियों ने अपनी सूची में शामिल कर एबी फॉर्म ऑफर किया। कुछ ने चुनाव चिह्न के लिए ले लिया और कुछ ने ठुकरा दिया।
इस बार सभी पार्टियों में इच्छुक उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए गए थे। सभी ने दावा किया था कि उनकी टिकट से लड़ने के इच्छुकों की संख्या कुल सीटों से 3 से 10 गुना है। उम्मीदवारी तय करना मुश्किल बताया जा रहा था लेकिन जब सूची घोषित हुई तो उसमें ऐसे अनेक नाम सामने आए हैं जिन्होंने उन पार्टियों के इंटरव्यू नहीं दिए थे।
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उत्तर नागपुर में एक युवा जिसे राकां अजीत पवार पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है, उसने कांग्रेस की टिकट के लिए इंटरव्यू दिया था। टिकट नहीं मिलता देख उसने निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बना लिया था। नामांकन दाखिल करने की पूर्व संध्या पर उसे बसपा का ऑफर मिला।
दूसरे दिन सुबह ‘घड़ी’ से ऑफर आ गया। उसने घड़ी चुन ली। दरअसल कांग्रेस व भाजपा को छोड़ दें तो शेष अन्य पार्टियों की नागपुर में पकड़ नहीं है। उनके पास सारे प्रभागों में चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार तो क्या, कार्य करने वाले कार्यकर्ता तक नहीं हैं। ऐसे में ऐन वक्त पर अधिक से अधिक उम्मीदवार दिखाने के लिए उन्होंने अपने एबी फॉर्म प्रसाद की तरह बांटे।






