बोगस कुणबी प्रमाणपत्र पर उम्रकैद की मांग, बबनराव तायवाडे ने सरकार से की सख्त कार्रवाई की अपील

Kunbi Certificate Controversy: बोगस कुणबी प्रमाणपत्र लेकर आरक्षण का लाभ उठाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठी है। राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष ऐसे मामलों में उम्रकैद के प्रावधान की मांग की।
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तायवाडे-वडेट्टीवार(सोर्सः सोशल मीडिया)
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OBC Reservation Controversy: बोगस कुणबी जाति का प्रमाणपत्र प्राप्त कर आरक्षण का लाभ उठाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। ऐसे व्यक्तियों के लिए आजीवन कारावास (उम्र कैद) का प्रावधान किया जाना चाहिए। यह मांग राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ के अध्यक्ष बबनराव तायवाडे ने की है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस संबंध में सीएम फडणवीस के समक्ष मांग रखेंगे।

बोगस ओबीसी या कुणबी प्रमाणपत्रों के कारण वास्तविक ओबीसी समाज का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। इस तरह की गड़बड़ियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार को चाहिए कि वह चुनाव नामांकन दाखिल करने से पहले उम्मीदवारों से जाति वैधता प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से मांगे। इससे भविष्य में कोई भी फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने की हिम्मत नहीं करेगा।

वडेट्टीवार पर कसा तंज

तायवाडे ने मंडल यात्रा को लेकर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार का नाम लिए बिना तंज कसा। उन्होंने कहा कि आप ओबीसी हैं तो आपको इस पर गर्व होना चाहिए। आरक्षण के फायदे लेते समय खुद को ओबीसी स्वीकार करना लेकिन 'जय ओबीसी' कहने में शर्म महसूस होना, यह बिल्कुल सही नहीं है।

प्रमाणपत्र क्यों दिए, दें जवाब : वडेट्टीवार

सरकार द्वारा दिए गए कुणबी प्रमाणपत्र यदि रद्द हो रहे हैं तो जिन प्रमाणपत्रों की वैधता नहीं थी, उनका वितरण क्यों किया गया? यह सवाल कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने उठाया है। उन्होंने कहा कि मराठवाड़ा के 3 जिला परिषद सदस्यों और एक नगरसेवक का कुणबी जाति प्रमाणपत्र अवैध घोषित होने के कारण उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई है, शासन द्वारा दिए गए प्रमाणपत्रों के आधार पर कई लोगों ने चुनाव लड़ा था।

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तायवाडे और वडेट्टीवार आमने-सामने

हालांकि अब ये प्रमाणपत्र अवैध साबित हो रहे हैं जिसके कारण संबंधित सीटों पर दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ गई है। प्रमाणपत्र रद्द होने को लेकर मराठा समाज के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को भी निशाना बनाया, इस पर कांग्रेस नेता भी मैदान में उत्तर आए हैं। ओबीसी आरक्षण संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है और इसे कोई आंच नहीं आनी चाहिए। कानूनी दायरे में लिए गए फैसले ही टिकते हैं।

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