बैंकों में सन्नाटा, सड़कों पर शोर! ‘5-Day Banking’ के लिए 8 लाख बैंक कर्मियों की हुंकार, नागपुर में कामकाज ठप
Bank strike Nagpur: विदर्भ में बैंक हड़ताल से 2,400 करोड़ का कारोबार ठप। 5-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर 8 लाख बैंक कर्मचारी सड़कों पर। जानें ग्राहकों पर क्या हुआ असर।
- Written By: प्रिया जैस
बैंककर्मियों की हड़ताल (सौजन्य-नवभारत)
5-day banking demands: सरकारी बैंकों में 3 दिनों के अवकाश के बाद मंगलवार को भी कामकाज नहीं हुआ। यूनियन बैंक कर्मचारियों की सभी 9 घटक यूनियनों ने यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) के बैनर तले एकजुट होकर सरकार के अड़ियल रवैये के खिलाफ अपने संकल्प और दृढ़ता का प्रदर्शन कर अपनी मांगें बुलंद कीं। हड़ताल से ग्राहकों व कारोबारियों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई।
कोई बैंक में रुपये निकालने पहुंचा तो कोई चेक लगाने के लिए। कारोबारियों के अनुसार चेक क्लीयर न होने से कंपनी से कैश डिस्काउंट नहीं मिलेगा। वहीं ग्राहक चेक लेकर बैंक पहुंचे लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। हर किसी को बैंक के बाहर खड़े गार्डों ने एक ही जवाब दिया कि हड़ताल है, काम नहीं हो पायेगा। हड़ताल से पूरे विदर्भ में करीब 2,400 करोड़ का व्यवसाय प्रभावित हुआ।
5 कार्य दिवस लागू हों
बैंक कर्मियों का कहना है कि 5 दिवसीय बैंकिंग प्रणाली के कार्यान्वयन को हल नहीं किया जा रहा है। हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र, विदेशी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक तथा सहकारी बैंकों में कार्यरत लगभग 8 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए। यूएफबीयू (नागपुर चैप्टर) के संयुक्त संयोजक एवं ईएमबीईए के महासचिव सुरेश बोभाटे ने कहा कि यूएफबीयू के बैनर तले बैंकर लगातार सप्ताह में 5 कार्य दिवस लागू करने की मांग कर रहे हैं।
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अब तक यूएफबीयू ने 12 द्विपक्षीय समझौते/ 9 संयुक्त नोट्स हासिल किए हैं। वर्ष 2015 में 10वें द्विपक्षीय समझौते/7वें संयुक्त नोट पर बातचीत के दौरान भारतीय बैंक संघ (आईबीए) और सरकार के बीच यह सहमति बनी थी कि हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहेगा तथा शेष शनिवार पूरे कार्य दिवस होंगे (अर्धदिवस नहीं)।
उन्होंने आगे कहा कि आईबीए ने 5 दिवसीय बैंकिंग की सिफारिश की थी और वर्ष 2022 में सरकार तथा आईबीए ने यूएफबीयू के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने पर सहमति व्यक्त की थी जिसमें कार्य दिवसों में प्रति दिन कार्य घंटे बढ़ाकर शेष सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने का प्रस्ताव था।
वर्ष 2023 में विस्तृत चर्चा के बाद यह सहमति बनी कि सोमवार से शुक्रवार तक प्रति दिन 40 मिनट कार्य समय बढ़ाया जाएगा और सभी शनिवार अवकाश रहेगा। हालांकि इस आश्वासन और समझौता ज्ञापन (एमओयू) के बावजूद सरकार ने अब तक इसकी स्वीकृति नहीं दी है, इसलिए हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ा।
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सरकार की भेदभावपूर्ण नीति
ईएमबीईए के चेयरमैन जयवंत गुरवे ने कहा कि चूंकि बैंकों में पहले से ही दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है, इसलिए शेष शनिवारों को अवकाश घोषित करने और कार्य दिवसों में कार्य घंटे बढ़ाने से ग्राहकों को कोई विशेष असुविधा नहीं होगी, खासकर तब जब वैकल्पिक बैंकिंग चैनल उपलब्ध हैं। उन्होंने सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियों के प्रति बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों में गहरे असंतोष को व्यक्त किया।
हड़ताल को 100% सफल बनाने के लिए सभी साथियों को बधाई देते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार 5 दिवसीय बैंकिंग की मांग पर विचार नहीं करती है तो यूनियनें संघर्ष को और तेज करेंगी। प्रदर्शन ईएमबीईए के अध्यक्ष गुरवे और सचिव चैंदिल अय्यर के नेतृत्व में हुआ।
यूएफबीयू के घटक संगठनों में एआईबीओसी के महेंद्र धोंडसे, एनसीबीई के महेश खरखटे, नागेश दांडे, हरिभान कोडे, श्रीकांत पाटिल, विजय मेश्राम और गंगाधर धरस सहित सभी ने एकमत होकर एक स्वर में बैंक कर्मचारियों के समर्थन में आवाज उठाई।
