गरीब मरीज जाएं तो कहां जाएं? नागपुर AIIMS में बेड की भारी किल्लत, ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन के लिए महीनों का इंतजार
Nagpur AIIMS Bed Shortage: एम्स नागपुर के ऑर्थोपेडिक विभाग में बेड की कमी के कारण सर्जरी के लिए 3-4 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। मरीजों को बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
एम्स नागपुर (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
AIIMS Nagpur Surgery Waiting: नागपुर 54 वर्षीय हेमंत का जून महीने में एक्सीडेंट हुआ। शुरुआत में प्राइवेट अस्पताल में इलाज करया लेकिन आर्थिक संकट होने से एम्स में इलाज के लिए गया, डॉक्टरों ने पैर की हड्डी जोड़ने के लिए ऑपरेशन का सुझाव दिया। इसके लिए सभी टेस्ट भी हो गये। हेमंत अब तक करीब 10-12 बार अस्पताल में जाकर पूछताछ कर चुका है लेकिन हर बार एक ही जवाब मिलता है कि अभी बेड खाली नहीं है। यह वेदना केवल हेमंत की नहीं है बल्कि ऐसे अनेक मरीजों को दर्द के साथ जीना पड़ रहा है।
एम्स में बेड की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या की वजह से यह समस्या पैदा हो गई है। बताया जाता है कि आर्थोपेडिक विभाग में ऑपरेशन के लिए करीब 3-4 महीने की वेटिंग चल रही है। मरीज बार-बार आकर पूछताछ करते हैं लेकिन उन्हें इंतजार करने के लिए कहा जाता है।
AIIMS में बेड और स्टाफ होने के बावजूद ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार
इंतजार का मतलब होता है कि मरीज वेदना सहन करते रहना है। एम्स में कुल बेड 920 हैं। इनमें इमरजेंसी के करीब 50 बेड का भी समावेश है। वहीं आर्थोपेडिक विभाग को में करीब 40 बेड हैं। इनमें 20 पुरुष और 20 महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
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वहीं विभाग में एक प्रोफेसर, 2 एसोसिएट प्रोफेसर, 3 असिसटेंट प्रोफेसर और 6 सीनियर रेसिडेंट कार्यरत हैं। इनके अलावा पीजी स्टूडेंट्स भी हैं। यानी स्टॉफ की कमी नहीं है। इसके बाद भी ऑपरेशन के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्वतंत्र हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग एम्स में स्वतंत्र हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग है।
एम्स में मरीजों की वेटिंग और सूचना व्यवस्था सुधारने की जरूरत
विभाग का काम है कि मरीजों की वेटिंग के अनुसार प्राथमिकता दी जाये। मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का ध्यान रखें। वेटिंग वाले मरीजों को फोन पर संपर्क कर उनके ऑपरेशन की जानकारी दी जाये लेकिन हेमंत की तरह अनेक मरीज हैं जिन्हें बार-बार चक्कर काटने के बाद भी कभी फोन पर सूचना नहीं दी जाती। दरअसल, आर्थो से संबंधित ऑपरेशन में खर्च अधिक आता है।
यही वजह है कि निर्धन व जरूरतमंदों के लिए एम्स सहारा बना हुआ है। केवल नागपुर या महाराष्ट्र के ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों के भी मरीज हैं। मरीजों को अस्पताल में आने के लिए किसी न किसी परिजन की मदद लेनी पड़ती है। मरीजों के साथ ही परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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युद्ध स्तर पर खत्म करना होगा वेटिंग
प्रतीक्षा सूची को कम करने के लिए प्रशासन की चाहिए कि विशेष मुहिम के तहत काम करें, समय पर ऑपरेशन नहीं होने से घाव शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने का जोखिम होता है। इस हालत में जिस ऑपरेशन को 2 घंटे लगने हैं वहीं बाद में उसमें 4-5 घंटे तक लग जाते हैं। इसके साथ ही रिकवरी का भी समय बढ़ जाता है।
