खटारा बसों पर हंगामा, नागपुर में ‘आपली बस’ कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की परिवहन व्यवस्था प्रभावित
Nagpur Aapli Bus Strike: नागपुर में 'आपली बस' की खराब हालत और कर्मचारियों के शोषण के विरोध में शिवसेना (उबाठा) के नेतृत्व में आंदोलन हुआ। आश्वासन के बाद हड़ताल स्थगित की गई।
- Written By: अंकिता पटेल
आपली बस हड़ताल, नागपुर परिवहन,(सोर्स: नवभारत फाईल फोटो)
Nagpur Transport Bus Strike: नागपुर शहर में दौड़ने वाली ‘आपली बस’ की खस्ताहाल स्थिति और कर्मचारियों के आर्थिक शोषण को लेकर शिवसेना (उबाठा) के नेतृत्व में जमकर आंदोलन हुआ जिसके कारण शहर की परिवहन व्यवस्था कुछ समय के लिए प्रभावित रही। शिवसेना नेता नितिन तिवारी और नागपुर जिला ड्राइवर संगठन के नेतृत्व में परिवहन समिति के सदस्य व पार्षद शैलेश पांडे की प्रमुख उपस्थिति में वहीं स्थित मोरभवन डिपो में ‘आपली बस’ कर्मचारियों ने कुछ देर के लिए हड़ताल भी की किंतु आश्वासन मिलने के बाद उरे स्थगित कर दिया।
खटारा बसों की पोल खोली, यात्रियों की जान से खिलवाड़ हड़ताल की सूचना मिलते ही ‘चलो’ कंपनी और नागपुर महानगरपालिका के परिवहन अधिकारी मोरभवन डिपो पहुंचे। वहां प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों को डिपी में खड़ी बसों के अंदर ले जाकर उनकी दयनीय स्थिति दिखाई, उन्होंने अधिकारियों को बसों के खराब हैंड ब्रेक, गायब फायर सिलेंडर और फस्र्ट ऐड बॉक्स दिखाते हुए डीजल बसों के फिटनेस पर गंभीर सवाल खड़े किए, नेताओं ने ऑपरेटरों और परिवहन अधिकारियों के उदासीन रवैये पर तोखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि ऐसी कबाड़ हो चुकी बसें सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं जो सीधे तौर पर जनता और कर्मचारियों की जान के साथ खिलवाड़ है।
आर्थिक शोषण के भी आरोप
अधिकारियों द्वारा न्यूनतम वेतन पर अपने तथ्य रखे जाने के बावजूद कर्मचारी संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने सिविल लाइंस स्थित मनपा कार्यालय तक मोचर्चा निकाला, पुलिस को मध्यस्थता के बाद आंदोलनकारियों के एक शिष्टमंडल ने मनपा उपायुक्त से मुलाकात की। इस बैठक में परिवहन अधिकारी और ‘चलो’ कंपनी के कर्मचारी भी मौजूद थे।
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बैठक में आरोप लगाते हुए बताया गया कि ड्राइवरों और कंडक्टरों को एचआरए तथा सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जा रहे हैं। इसके अलावा मैकेनिकों को नियमानुसार वेतन न देकर मात्र 12,000 रुपये का अल्प वेतन दिया जा रहा है और डिपो में कर्मचारियों के लिए कैंटीन को भी कोई व्यवस्था नहीं है।
उन्होंने मांग की कि ‘चलो’ कंपनी को ऑपरेटरों द्वारा कामगारों के वेतन और भत्तों के भुगतान का चालान चेक करने के बाद ही प्रशासन को बिल अदायगी की सिफारिश करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेटरों और चलो कंपनी की मिलीभगत से कर्मचारियों का आर्थिक शोषण हो रहा है और परिवहन अधिकारियों की चुप्पी ऑपरेटरों के हौसले बढ़ा रही है।
सड़कों पर कबाड़ बसें दिखीं तो RTO में जमा करेंगे
उन्होंने चेतावनी दी कि जो डीजल बसें संचालन के योग्य नहीं हैं उन्हें डिपो से बाहर न निकलने दिया जाए। उन्होंने अल्टीमेटम दिया कि यदि शिवसैनिकों को सड़कों पर कोई भी कबाड़ बस दौड़ती मिली तो वे उसे सीधा आरटीओ कार्यालय में जमा करवाएंगे और सड़क पर उतरकर तीव्र आंदोलन करेंगे।
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इन आक्रामक तेवरों और जायज मांगों के दबाव में उपायुक्त ने ‘चली’ कंपनी और मनपा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि अगले दिन से केवल वही बसें सड़कों पर उतरेंगी जो पूरी तरह से फिट होंगी।
