

Nagpur Human Wildlife Conflict: नागपुर में तेंदुओं की बढ़ती संख्या और लगातार सिकुड़ते प्राकृतिक आवास के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। तेंदुओं की वास्तविक संख्या के सटीक आंकड़ों का अभाव इस समस्या के समाधान में बड़ी बाधा है। जंगलों के आसपास बसे गांवों और शहरी क्षेत्रों में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी से लोगों में दहशत का माहौल है। बता दें कि प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में तेंदुओं की संख्या 2018 में 1,690 दर्ज की गई थी।
वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 1,985 हो गई, लगभग 4 वर्षों में तेंदुओं की संख्या में 295 की बढ़ोतरी आई। हालांकि वर्ष 2026 में निश्चित रूप से संख्या में बढ़ोतरी हुई होगी लेकिन इसके सटीक आंकड़े फिलहाल मौजूद नहीं हैं। जानकारों का कहना है कि मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र में तेंदुओं की संख्या सबसे अधिक है और भारत की कुल तेंदुआ आबादी का 14 प्रतिशत हिस्सा यहीं है।
वन क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप, विकास परियोजनाओं और अतिक्रमण के कारण तेंदुओं का प्राकृतिक आवास लगातार कम हो रहा है। भोजन और सुरक्षित ठिकानों की तलाश में तेंदुए मानव आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं जिससे संघर्ष की घटनाएं होती हैं।
तेंदुए कभी मानव तो कभी उनके मवेशियों पर हमला कर देते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि प्रभावी संरक्षण और संघर्ष रोकने के लिए तेंदुओं की नियमित गणना, उनकी गतिविधियों की निगरानी तथा संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान जरूरी है। सटीक आंकड़ों के अभाव में न तो संरक्षण की ठोस रणनीति बन पा रही है और न ही स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए वन संरक्षण, जनजागरूकता और प्रबंधन को प्राथमिकता देना समय की मांग है।
महाराष्ट्र के साथ पूरे देश में तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि वन विभाग के कड़े प्रयासों से यह संभव हुआ है लेकिन घट रहे वन क्षेत्रों के कारण अब तेंदुओं की आबादी सिरदर्द बढ़ा रही है। बता दें कि रिपोर्ट के अनुसार भारत में तेंदुओं की कुल आबादी में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2018 में देश में 12,852 तेंदुए दर्ज किए गए थे। यह संख्या बढ़कर 2022 में 13,874 हो गई। फिलहाल इस वर्ष के आंकड़े स्पष्ट नहीं हो सके हैं।
तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी के साथ मौत के मामले भी बढ़े हैं। बता दें कि पिछले 5 वर्षों में 675 तेंदुओं की मौत के मामले सामने आए हैं। उक्त अवधि के दौरान 135 औसतन वार्षिक मौतें हुई है। सर्वाधिक मौतें वर्ष 2021 में दर्ज हुई थीं। तब 167 तेंदुए मारे गए थे। 2023 में 77 तेंदुओं की मौतों के साथ सबसे कम मृत्यु दर्ज की गई।
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से अभिषेक सिंह की रिपोर्ट