नागपुर मनपा में नियमों की धज्जियां? टेंडर खेल का भंडाफोड़, ठेकेदार एसोसिएशन का बड़ा आरोप
Nagpur Municipal Corporation: नागपुर मनपा में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताओं और मिलीभगत के आरोपों से हड़कंप मच गया है। ठेकेदार एसोसिएशन ने महापौर को शिकायत सौंपकर जांच की मांग की है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर मनपा, टेंडर घोटाला, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Municipal Tender Irregularities: नागपुर महानगरपालिका के भीतर टेंडर प्रक्रिया में चल रही गंभीर अनियमितताओं और मनमानी का बड़ा खुलासा हुआ है। आश्चर्यजनक यह है कि महानगरपालिका के ही ठेकेदारों की नागपुर महानगरपालिका कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने कई तरह के आरोप लगाते हुए भंडाफोड़ किया है।
आरोप है कि मनपा के अधिकारी और कुछ चुनिंदा ठेकेदार मिलीभगत करके निविदा प्रक्रिया में खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं जिससे न केवल पारदर्शी और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा खत्म हो रही है बल्कि जनता के करोड़ों रुपयों के नुकसान की भी आशंका है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय नायडू द्वारा महापौर को लिखे गए एक कड़े शिकायत पत्र ने मनपा प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है।
फर्जी दस्तावेज और चहेतों को फायदा
नागपुर महानगरपालिका कॉन्ट्रैक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में अपात्र ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए बड़े पैमाने पर फर्जी पूर्णता प्रमाणपत्र और गलत बिड क्षमता (Bid Capacity) वाले दस्तावेज स्वीकार किए जा रहे हैं।
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सबसे चौकाने वाली बात यह है कि टेंडर प्रक्रिया को महत्वपूर्ण चरणों में ब्लॉक कर दिया जाता है, ताकि केवल 2 या 3 चुनिंदा ठेकेदार ही इसमें भाग ले सकें, ये ठेकेदार आपस में साठगांठ कर लगभग समान दरें भरते हैं। पत्र में चेतावनी दी गई है कि अधिकारियों द्वारा पुरानी गलतियों से सबक न लेने के कारण मनपा में एक और नया घोटाला पनप रहा है जिसमें टेंडर क्लर्क से लेकर इंजीनियरों तक की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।
FAS प्रणाली का दुरुपयोग और फाइलों की हेराफेरी
मनपा में ठेकेदारों के बिलों के भुगतान के लिए बनाई गई FAS प्रणाली भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि बिलों को जानबूझकर ‘प्रोविजन’ के नाम पर अधीक्षक अभियंता के पास भेजा जा रहा है, जबकि किसी भी नियम पुस्तिका (Manual) में इसका जिक्र नहीं है।
ठेकेदारों का दबी जुबान में कहना है कि जब तक अधीक्षक अभियंता कार्यालय में ‘भेंट’ (मुलाकात लेन-देन) नहीं की जाती, तब तक बिल आगे नहीं बढ़ते। कई बार बिलों को जानबूझकर गलत टेबलों पर भेज दिया जाता है।
पूर्व में दी गई थी चेतावनी, प्रशासन रहा मौन इससे पहले 23 जनवरी 2026 को भी ठेकेदार संगठन ने मनपा आयुक्त को इन धांधलियों के संबंध में पत्र लिखा था और ‘स्वतंत्र टेंडर सेल’ स्थापित करने की मांग की थी लेकिन प्रशासन ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
महापौर से की गईं प्रमुख मांगें
संपूर्ण टेंडर प्रक्रिया की गहन जांच (ऑडिट) की जाए।
नियमों की अनदेखी करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारी पर कठोर दंडाासक कार्रवाई हो।
टेंडर नियमों और वैधानिक प्राों को सभी के लिए समान रूप से लागू किया जाए।
निष्पक्ष और पारदर्शी व्यवस्था के लिए एक “स्वतंत्र टेंडर सेल’ की तत्काल स्थापना की जाए,
नियमों का दोहरा मापदंड और ठेकेदारों का उत्पीड़न
EPF (कर्मचारी भविष्य निधि। नियमों को लेकर मनपा का दोहरा रवैया सामने आया है। जहां सुरक्षा गार्डों और कम्प्यूटर ऑपरेटरों के लिए EPF अनिवार्य है वहीं कुछ चहेते ठेकेदारों को केवल एक हलफनामा लेकर वैधानिक शर्ती से छूट दी जा रही है।
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इसके अलावा, ईमानदार ठेकेदारों को परेशान करने के लिए बिना किसी ठोस कारण के छोटी-छोटी तकनीकी कमिया निकालकर उनके टेंडर रद्द किए जा रहे है। स्थिति यह है कि टेंडर जमा करने के बाद कार्यदिश जारी होने में 4 से 6 महीने तक का समय लग रहा है।
इस पत्र की प्रतिया मनपा आयुक्त, स्थायी समिति के सभापति, स्ताधारी पक्ष नेता और विपक्ष के नेता को भी भेजी गई है। अब देखना यह है कि इस गंभीर शिकायत के बाद प्रशासन कोई सख्त कदम उठाता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
