500 रूपए का सैकड़ा अब 800 रूपए के पार! नागपुर में मानसून के स्वाद पर लगा महंगाई का तड़का
Nagpur Roasted Corn: नागपुर में मानसून के साथ भुट्टे की मांग बढ़ गई है। पिछले साल की तुलना में 100 भुट्टों की बोरी 200 रुपये महंगी होकर 800 रुपये तक पहुंच गई है, फिर भी खरीदारों की भीड़ बनी हुई है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, मानसून, भुट्टे की कीमत, प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: एआई फोटो )
Nagpur Monsoon Roasted Corn Prices: नागपुर में भुट्टे और मानसून का एक अलग ही रिश्ता है। जैसे ही बारिश आती है, भुट्टा अपनी महक से लोगों को खाने के लिए ललचा देता है। रिमझिम बारिश के बीच लोग कभी ठेले पर तो कभी घर में ही इसका स्वाद चखते हैं। फिलहाल बारिश हमसे भले ही लुका-छिपी खेल रही हो लेकिन भुट्टे ने लोगों को अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया है।
रिमझिम बारिश के बीच नींबू, नमक और मिर्ची से लिपटा गर्मागर्म भुट्टा मुंह का जायका बदल देता है। अभी हर सड़क गली-मोहल्ले में एक न एक भुट्टे वाला भुट्टा सेंकता मिल ही जाएगा। वहीं इनके पास बारिश का लुत्फ उठाते हुए भुट्टे खाने वालों का झुंड दिखाई दे ही जाएगा।
मार्केट में अभी इसकी आवक भी बढ़ गई है। पिछले वर्ष के मुकाबले भुट्टे की बोरी में 200 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। 500 से 600 रुपये में 100 नग मिलने वाला भुट्टा अभी 800 रुपये चल रहा है।
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कहीं 30 तो कहीं 35 रुपये में मिल रहा भुना हुआ
शहर के अलग-अलग स्थानों में भुट्टे वालों द्वारा कीमत भी कहीं 30 तो कहीं 35 रुपये ली जा रही है। पिछले वर्ष के मुकाबले भुट्टा खाने वालों को इस वर्ष 5 से 10 रुपये ज्यादा ही जेब ढीली करनी पड़ रही है। व्यापारियों के अनुसार इस समय फुले मार्केट में रोज छिदवाड़ा, सिवनी और छपारा से स्वीट कॉर्न के साथ सादे भुट्टे की आवक हो रही है। मार्केट में भुट्टों का उठाव तो है लेकिन अभी पिछले वर्ष जैसा नहीं है।
नासिक से आता है स्वीट कॉर्न
मार्केट में स्वीट कॉर्न की आवक मुख्यतः नासिक से ही होती है लेकिन छिंदवाड़ा के किसानों ने भी इसकी खेती शुरू की है।
स्वीट कॉर्न खाने में बड़ा मीठा लगता है लेकिन लोग सादा भुट्टा ही अधिक खाते हैं। एक समय था जब शहर में स्वीट कॉर्न ही बहुत अधिक पसंद किया जाता था लेकिन अब इसका चलन बहुत कम हो गया है।
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पहले स्वीट कॉर्न की खेती भंडारा के आसपास के गांवों में बहुतायत में होती थी और वहां से 8 से 10 टैम्पो स्वीट कॉर्न की आवक होती थी।
इसे लोग गावरानी के नाम से जानते थे लेकिन आज इसके कम होते चलन के कारण वहां से केवल 2 से 3 ट्रॉली ही आती हैं।
