नागपुर: बारिश में ‘फव्वारा’ बने मेट्रो ब्रिज, अब फेज-2 में बदलेगी पूरी ड्रेनेज व्यवस्था
Nagpur Metro Rainwater Harvesting: नागपुर में बारिश के दौरान मेट्रो वायाडक्ट से रिसाव और जलभराव की शिकायतों के बाद महा मेट्रो ने फेज-2 के लिए नई और उन्नत जल निकासी प्रणाली तैयार करने का फैसला किया है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर मेट्रो, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, (साेर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
Nagpur Metro Phase 2 Rainwater Harvesting: नागपुर जिले में मूसलाधार बारिश के दौरान जलभराव, रिचार्ज प्वाइंट्स के जाम होने, वायाडक्ट के ड्रेनेज पाइपों से रिसाव और सड़कों पर पानी बहने की शिकायतों के बाद महा मेट्रो की वर्षा जल संचयन (रेन वॉटर हार्वेस्टिंग) व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। पहले चरण वाले भाग में बारिश के दिनों में सभी के सभी क्षेत्र के ब्रिज ‘फव्वारे’ में तब्दील हो जाते हैं।
नीचे चलने वाले वाहन धारकों के लिए खतरा भी बन गए हैं। कहीं तेजी से पानी गिर रहा है, तो कहीं रिमझिम बारिश का मजा ये ‘डक्ट’ दे रहे हैं। ऐसे में अब महा मेट्रो ने फेज-1 में सामने आई कमियों से सबक लेते हुए मेट्रो फेज-2 के लिए नई और अधिक उन्नत जल निकासी प्रणाली तैयार की है।
सूत्रों के अनुसार फेज-1 कॉरिडोर पर बार-बार सामने आई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए फेज-2 में वर्षा जल प्रबंधन की पूरी व्यवस्था को नए सिरे से डिजाइन किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि यह प्रणाली पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और टिकाऊ होगी।
सम्बंधित ख़बरें
वर्धा में 145 स्कूल बसें बिना फिटनेस सर्टिफिकेट दौड़ रहीं, RTO ने लगाया 26.64 लाख का जुर्माना
वर्धा के 213 गांवों पर बाढ़ का मंडराया खतरा; पिछले साल 63 हजार हेक्टेयर फसल हुई थी तबाह, यंत्रणा सज्ज
मुंबई: पवई झील के पास दरगाह के नजदीक दिखा 7 फीट लंबा मगरमच्छ, वन विभाग ने सुरक्षित किया रेस्क्यू
मुंबई के लिए रेड अलर्ट, 90km की रफ्तार से चलेंगी हवाएं; झीलों का जलस्तर 16.92% पहुंचा, विहार झील 90% भरी
नई व्यवस्था के तहत खुले ड्रेनेज पाइपों की जगह वर्षा जल को पीवीसी पाइपलाइन के माध्यम से मेट्रो पिलरों के भीतर से प्रवाहित किया जाएगा। इसके बाद पानी को सड़क के मध्य भाग में स्थित विशेष रूप से विकसित रिचार्ज जोन में छोड़ा जाएगा, जो फूलों की क्यारियों के नीचे बनाए जाएंगे।
एक्वा लाइन पर नई रिचार्ज प्रणाली से घटेगा जलभराव
रिचार्ज संरचनाओं में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। पहले जहां 1×1 मीटर के छोटे गड्डों और 6 से 7 मीटर गहरे रिचार्ज बोर पर निर्भरता थी, वहीं अब 1,200 मिमी व्यास वाले तीन प्रीकास्ट कलेक्शन चैंबर, बड़े कनेक्टिंग पाइप, फिल्टर मीडिया सिस्टम और सफाई के लिए विशेष टैप लगाए जाएंगे, जिससे मिट्टी और गाद जमा होने की समस्या कम होगी।
रिचार्ज संरचनाओं की गहराई भी स्थानीय भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों के अनुसार तय की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक एक्वा लाइन के वायाडक्ट से आने वाले वर्षा जल को सड़क के मध्य भाग में स्थित रिचार्ज संरचनाओं तक पहुंचाने की योजना है।
इस प्रणाली का उद्देश्य भूजल स्तर बढ़ाना और सतही जल प्रवाह को नियंत्रित करना है। हालांकि फेज-1 में मिट्टी, गाद और कचरे के कारण कलेक्शन प्वाइंट्स के बार-बार जाम होने से सड़कों पर जलभराव और पानी जमा होने की समस्याएं सामने आती रही हैं।
होती रहीं सड़कें खराब
मनपा के हॉट मिक्स विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह समस्या केवल अस्थायी असुविधा तक सीमित नहीं है, लगातार रिसाव और जलभराव के कारण सड़कें तेजी से खराब होती हैं, गड्ढे बनते हैं और रखरखाव पर अतिरिक्त खर्च बढ़ता है।
यह भी पढ़ें:- मुंबई: पवई झील के पास दरगाह के नजदीक दिखा 7 फीट लंबा मगरमच्छ, वन विभाग ने सुरक्षित किया रेस्क्यू
अब नागरिकों और नगर प्रशासन की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या मेट्रो फेज-2 की नई जल निकासी व्यवस्था फेज-1 की कमियों को दूर कर पाएगी या फिर संशोधित डिजाइन के बावजूद पुरानी समस्याएं दोबारा देखने को मिलेंगी।
