काले फीते बांधकर मार्ड का विरोध, होम्योपैथिक डॉक्टरों का CCMP में पंजीकरण का विरोध, कल से सेवा बंद
Nagpur Homeopathic Doctors' Protest: नागपुर में होम्योपैथिक डॉक्टरों ने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) के एक फैसले के खिलाफ आंदोलन किया। डॉक्टरों ने काली फीत लगाकर विरोध प्रकट किया।
- Written By: प्रिया जैस
होम्योपैथिक डॉक्टरों का विरोध (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur News: नागपुर में होम्योपैथिक डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (एमएमसी) के सीसीएमपी में पंजीकरण के फैसले का विरोध में राज्यभर के मेडिकल कॉलेजों के निवासी डॉक्टरों के संगठन मार्ड ने आंदोलन किया। डॉक्टरों ने काली फीत लगाकर विरोध प्रकट किया। भविष्य में आंदोलन तीव्र होने की उम्मीद है।
सेंट्रल मार्ड, स्थानीय मार्ड, बीएमसी मार्ड, एएसएमआई और इंटर्न संगठन की ओर से विरोध प्रकट किया गया। मेडिकल मार्ड के अध्यक्ष डॉ. धीरज सालुंके, महासचिव डॉ. सुयश धावने ने बताया कि होम्योपैथिक डॉक्टरों को ऐेलोपैथी की प्रैक्टिस का सीधा मतलब मरीजों की स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करना है। यह आधुनिक वैद्यकशास्त्र की विश्वसनीयता के साथ धोखेबाजी है। सरकार द्वारा जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यभर में आंदोलन को तीव्र किया जाएगा।
हेल्थ यूनिवर्सिटी ने डिजाइन किया कोर्स
दरअसल सीसीएमपी 600 घंटे का कोर्स बीएचएमएस स्नातकों के लिए डिजाइन किया गया है। जिनके पास 5.5 वर्ष की शिक्षा और एलोपैथिक अस्पतालों में 5-10 साल का अनुभव है उन्हें 600 घंटे का आधुनिक फॉर्माकोलॉजी प्रशिक्षण दिया जाता है। 2010 में एमसीआई ने संसदीय समिति और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ परामर्श के बाद विशेषज्ञों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य व्यवसायी पाठ्यक्रम तैयार किया है जो महाराष्ट्र हेल्थ यूनिवर्सिटी के अधिनियम की धारा 65(4) के तहत डिजाइन किया गया है।
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सरकार क्यों देना चाहती है मंजूरी
1. प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य का अधिकार है जो सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों द्वारा प्रदान किया जाना चाहिए। हजारों होम्योपैथी डॉक्टर आरएमओ के रूप में कार्य करते हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 10,000 आयुष डॉक्टर हैं।
2. लगभग 76 फीसदी एमबीबीएस डॉक्टर शहरी क्षेत्रों में काम करते हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी आयुष डॉक्टरों पर आ जाती है। महाराष्ट्र के विदर्भ जैसे कुछ क्षेत्रों में 85 वर्ष की आयु में 180 किलोमीटर के क्षेत्र में केवल एक एमबीबीएस डॉक्टर सेवा दे रहा है और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवा देने के लिए कोई भी नया एमबीबीएस स्नातक तैयार नहीं है।
3. होम्योपैथिक डॉक्टर निजी क्षेत्र में 60 फीसदी ओपीडी और आईपीडी मामलों को संभालता है जिसमें पहले से ही आयुष पेशेवर शामिल हैं। यही वजह है कि सरकार इन डॉक्टरों को अधिकार देना चाहती है।
डॉक्टरों का कल 24 घंटे सेवा बंद
होम्योपैथिक डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा रजिस्ट्रेशन देने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से 18 सितंबर को 24 घंटे का राज्यव्यापी सेवा बंद आंदोलन किया जाएगा। इसमें सभी एलोपैथी संगठन शामिल होंगे।
