SIR अभियान के ढीले रवैये पर DPC बैठक में हंगामा: उत्तर और मध्य नागपुर की उपेक्षा पर विधायकों का फूटा गुस्सा
Nagpur SIR Campaign: नागपुर की डीपीसी बैठक में एसआईआर अभियान की धीमी रफ्तार पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताई। कई क्षेत्रों में बीएलओ नहीं पहुंचने और खराब नियोजन का मुद्दा जोर-शोर से उठाया।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर, एसआईआर अभियान, डीपीसी बैठक, प्रतीकात्मक तस्वीर(सोर्स: AI फोटो)
Nagpur SIR Campaign DPC Meeting: राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के नियोजन को लेकर जिला नियोजन समिति (डीपीसी) की बैठक में जनप्रतिनिधियों ने तीखी नाराजगी व्यक्त की है। पूर्व मंत्री व विधायक नितिन राऊत ने आरोप लगाया कि उत्तर नागपुर में एसआईआर का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है और प्रशासन द्वारा आवश्यक नियोजन नहीं किया गया है।
वहीं विधायक प्रवीण दटके ने मध्य नागपुर में अधिकारियों के तबादले के कारण काम में हुए फेरबदल और असमंजस का मुद्दा उठाया। उत्तर नागपुर आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र होने के बावजूद प्रशासन द्वारा इस क्षेत्र की उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया गया।
एसआईआर अभियान शुरू हुए लगभग 20 दिन बीत जाने के बाद भी कई इलाकों में बूथ लेवल ऑफिसर नहीं पहुंचे हैं। घर-घर जाकर फॉर्म बांटने की प्रक्रिया पूरी न होने से नागरिकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
सम्बंधित ख़बरें
नागपुर में फिर सुलगी आंदोलनों की आग: संविधान चौक बना जेन जी के संघर्ष का गढ़, सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज!
भारत की पहली eVTOL फ्लाइंग टैक्सी PT-01 से उठा पर्दा, 2028 तक कमर्शियल लॉन्च का लक्ष्य
पूर्व पति से फोन पर बात करना पड़ा महंगा! पति ने गला घोंटकर पत्नी को उतारा मौत के घाट, ओशिवारा में सनसनी
नागपुर मनपा का कड़ा एक्शन: कमाल चौक और पारडी में भारी विरोध के बीच चला बुलडोजर
प्रवीण दटके की मांग
मध्य नागपुर में पिछले दो-ढाई महीनों से इस काम को संभाल रहे अधिकारी का ऐन वक्त पर तबादला किए जाने से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई है। नए अधिकारी को स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी न होने के कारण काम की गति धीमी हो गई है, इसलिए संबंधित अधिकारी का तबादला तुरंत रद्द करने की मांग की गई।
शिविरों और BLO को लेकर असमंजस
- प्रशासन ने 19 से 21 जुलाई तक शहर के सभी 6 विधानसभा क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित किए हैं, जहां मतदाता खुद जाकर जानकारी ले सकते हैं।
- हालांकि कई नागरिकों को शिविरों या अपने क्षेत्र के बीएलओ के बारे में कोई जानकारी नहीं है जिसके कारण उन्हें बीएलओ की तलाश में भटकना पड़ रहा है।
यह भी पढ़ें:-नागपुर में फिर सुलगी आंदोलनों की आग: संविधान चौक बना जेन जी के संघर्ष का गढ़, सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज!
- कई जगहों पर बीएलओ घर-घर जाने के बजाय शिविरों में या नगरसेवकों के आग्रह पर मंदिर, बुद्ध विहार और सार्वजनिक पुस्तकालयों में बैठकर काम कर रहे हैं जिससे जनता को परेशानी हो रही है।
