महाराष्ट्र में उद्योगों को लगा ‘440 वोल्ट’ का झटका! ₹11 यूनिट हुई बिजली, VIA ने जताया कड़ा विरोध
Maharashtra Industrial Electricity Tariff 2026: बिजली की दरों ने उद्योगों को दिया 'झटका'! ₹11 यूनिट पहुंची बिजली, VIA ने MERC के आदेश को बताया दमनकारी। मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग।
- Written By: प्रिया जैस
महावितरण (सौजन्य-सोशल मीडिया)
VIA Nagpur Prashant Mohota: विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (वीआईए) ने महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) द्वारा हाल ही में जारी टैरिफ ऑर्डर (केस नंबर 75/2025) पर गहरी निराशा और हैरानी व्यक्त की है। वीआईए के अनुसार आयोग ने उन्हीं जनविरोधी नीतियों को फिर से लागू कर दिया है जिन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट ने पहले अवैध घोषित कर रद्द कर दिया था।
वीआईए का कहना है कि एक ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बिजली सस्ती होने की बात कर रहे हैं, वहीं उद्योगों की बिजली ‘झटका’ देने जा रहा है। ऐसी स्थिति में राज्य में उद्योगों का संचालन करना मुश्किल हो जाएगा।
मुख्य आपत्तियां और चिंताएं
वीआईए का आरोप है कि हाई कोर्ट के निर्देश पर दोबारा की गई जनसुनवाई केवल एक दिखावा साबित हुई। एमईआरसी ने उपभोक्ताओं द्वारा दिए गए ठोस और डेटा-आधारित तर्कों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है।
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अत्यधिक बिजली दरें
महावितरण के दावों के विपरीत, यदि फिक्स्ड डिमांड चार्ज, एफएसी और टैक्स (टीओएस) को जोड़ा जाए, तो औद्योगिक कनेक्शन के लिए बिजली की प्रभावी लागत 11 रुपये प्रति यूनिट से अधिक हो गई है। महाराष्ट्र देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां बिजली की दरें दहाई अंक में हैं।
आयोग ने ‘नेट-मीटरिंग’ मॉडल के तहत सोलर ऊर्जा उत्पादन पर ग्रिड सपोर्ट चार्ज लगाने का फैसला किया है। यह शुल्क केवल ग्रिड को भेजी गई अतिरिक्त बिजली पर नहीं, बल्कि उपभोक्ता द्वारा स्वयं के उपयोग के लिए उत्पादित कुल सौर ऊर्जा पर लगाया जाएगा, जिसे वीआईए ने ‘तर्कहीन और दमनकारी’ बताया।
समाधान की मांग
वीआईए ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। संगठन ने बड़े उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि यदि उन्हें इस भारी लागत के बीच जीवित रहना है, तो उन्हें स्वयं के ‘कैप्टिव ग्रीन पावर’ अपनाने की दिशा में तेजी से बढ़ना होगा।
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बैंकिंग नियमों में बदलाव
पहले बैंकिंग पावर का उपयोग दिन के 17 घंटों तक किया जा सकता था, जिसे अब घटाकर 8 घंटे (सुबह 9 से शाम 5 बजे) कर दिया गया है। साथ ही अप्रयुक्त बिजली महीने के अंत में समाप्त हो जाएगी। यह नियम जुलाई 2025 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होगा, जिससे उपभोक्ताओं पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।
विदर्भ इंडस्ट्रीज एसोसिएशन अध्यक्ष प्रशांत मोहोता ने कहा जब उपभोक्ता पहले से ही वितरण नेटवर्क के रखरखाव के लिए डिमांड चार्ज दे रहे हैं, तो अपने खर्च पर पैदा की गई बिजली पर अतिरिक्त शुल्क लगाना सरासर गलत है। यह कदम नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों के प्रति विश्वास को खत्म कर देगा।
