प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Maharashtra Board Paper Leak Coaching Center Scam: महाराष्ट्र में 12वीं स्टेट बोर्ड के फिजिक्स और केमेस्ट्री के पेपर लीक मामले में नागपुर पुलिस ने अब तक 4 आरोपियों को दबोचा है। वाट्सअप ग्रुप पर पेपर लीक करने वालों का कनेक्शन कोचिंग संस्था से होने का खुलासा हो रहा है। इस घटना के बाद कोचिंग संस्थाओं की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। पेपर लीक कराने में कर्मचारियों और अधिकारियों की भी मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। कुछ देर पहले पेपर लीक करने के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण MCQ (मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चन) माना जा रहा है जो हर पेपर में 10-20 अंकों तक के होते हैं।
वर्तमान में कोचिंग संस्थाओं के बीच तगड़ी स्पर्धा चल रही है। हर संस्था अपना बेहतरीन रिजल्ट देने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाती है। जिस संस्था का रिजल्ट जितना बेहतरीन, उसके पास छात्रों की संख्या भी उतनी ही अधिक होती है। साथ ही उस संस्था का ‘रुतबा’ भी बढ़ जाता है। ‘रुतबा’ ही संस्था की फीस तय करता है। 12वीं फिजिक्स और केमेस्ट्री के पेपर में कोचिंग संस्था के लोगों के नाम आने के बाद यह संदेह और गहरा हो गया है।
सूत्रों की मानें तो पेपर लीक की संभावनाएं ज्यादा नहीं बनतीं। कुछ ही स्थिति में पेपर लीक हो सकता है। दरअसल 6-7 केंद्रों के लिए एक कस्टोडियन सेंटर होता है। यहां सभी पेपर परीक्षा से पहले रखे जाते हैं। पेपर वाले दिन सेंटर से पेपर के लिफाफे संबंधित केंद्रों तक भेजे जाते हैं। यह पेपर परीक्षा के आधा घंटा पहले भेजे जाते हैं, जबकि छात्रों को परीक्षा शुरू होने से 10 मिनट पहले पेपर दे दिया जाता है, ताकि छात्र प्रश्नों को पढ़कर लिखने की तैयारी कर सकें। जैसे ही पेपर की निर्धारित समयावधि शुरू होती है, वैसे ही उत्तर पत्रिका वितरित की जाती है।
जानकारों की मानें तो कस्टोडियन से केंद्र के बीच ही लिफाफे का सील खोलकर पेपर की मोबाइल पर फोटो लिये जाने की संभावना है। यह संभावना इसलिए भी है क्योंकि परीक्षा शुरू होने से कुछ ही देर पहले वाट्सअप ग्रुप पर पेपर मिल रहे हैं। पिछले वर्ष भी इसी तरह का पैटर्न सामने आया था लेकिन किसी भी तरह की शिकायत नहीं होने के कारण मामला उजागर नहीं हो सका।
बोर्ड की परीक्षा में मल्टीपल च्वाइस क्वेश्चन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह वैकल्पिक होने से ज्यादा लिखने की जरूरत नहीं होती, साथ ही इसमें अंक भी पूरे मिलते हैं। हर पेपर में कुल अंकों के अनुसार एमसीक्यू 10-20 अंकों तक होते हैं। 80 अंक के पेपर में 10 से लेकर 20 अंक तक आसानी से मिल जाते हैं। यदि छात्र प्रश्नों के लिखित उत्तर में कम से कम 25-30 अंक भी हासिल करें तो प्रैक्टिकल जो स्कूलों के अधिकार में होता है, उसमें 20 में 18 -20 अंक तक मिलने पर 70 फीसदी तक परिणाम बनाने में कोई मुश्किल नहीं होती।
यह भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में बदला मौसम का मिजाज, नागपुर-यवतमाल-वर्धा समेत विदर्भ के कई जिलों में हुई झमाझम बारिश
कई छात्र लिखित प्रश्नों के उत्तर ज्यादा लिखे तो फिर अंक 80 फीसदी से ज्यादा हो जाते हैं। पेपर लीक से लेकर केंद्रों में नकल कराने में भी एमसीक्यू वाला पैटर्न ही सामने आता है क्योंकि इसके लिए खुले तौर पर नकल कराने की जरूरत नहीं पड़ती।
हालांकि सदर पुलिस मामले की जांच कर रही है। इसमें सभी खुलासे हो जाएंगे लेकिन बीच रास्ते में लिफाफा खोलकर उसकी फोटो निकालने वाला एंगल यदि सच साबित हुआ तो फिर इसमें कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता क्योंकि पेपर बंद लिफाफे की जांच केंद्र प्रमुख भी करते हैं। इसके बाद ही परीक्षा हॉल में छात्रों के सामने इसे खोला जाता है।