काटोल नगर परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर मंडराया खतरा सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

Katol Municipal Council: सुप्रीम कोर्ट ने काटोल नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना देशमुख की जाति वैधता से जुड़े हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी है। इससे उनकी अध्यक्ष पद की कुर्सी खतरे में आ गई है।
Maharashtra Caste Validity Certificate
बॉम्बे हाई कोर्ट सोर्स- सोशल मीडिया
Published on
Updated on

Maharashtra Caste Validity Certificate: नागपुर जिले के काटोल नगर परिषद में 2 दिसंबर 2025 को हुए आम चुनाव में अर्चना देशमुख ने ओबीसी (महिला) आरक्षित श्रेणी से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था। 21 दिसंबर 2025 को घोषित नतीजों में उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 2,300 वोटों के भारी अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी।

नामांकन के दौरान उन्होंने अपना 'कुणबी' (ओबीसी) जाति प्रमाणपत्र पेश किया था और नियमानुसार 6 महीने के भीतर जाति वैधता प्रमाणपत्र जमा करने का हलफनामा दिया था जिसे जाति दावा सत्यापन के लिए भेजा गया था लेकिन 19 जून 2026 को जाति जांच समिति ने उनके दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता और उनके पिता के स्कूल रिकॉर्ड में उनकी जाति 'मराठा' दर्ज है।

हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और समिति के फैसले को चुनौती दी थी। जिस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने जाति वैधता रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई जिस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायाधीश चंद्रशेखर ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।

Maharashtra Caste Validity Certificate
नागपुर यूनिवर्सिटी का फैसला, बंद होगी री-वैल्यूएशन प्रक्रिया, मिलेगी उत्तरपुस्तिका की स्कैन कॉपी

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जाति वैधता समिति का आदेश बरकरार

  • बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कल्पना उमप की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई।

  • अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाए जाने के कारण जाति वैधता प्रमाणपत्र समिति का आदेश फिलहाल यधावत हो गया है। हाई कोर्ट के आदेश के चलते अर्चना देशमुख का काटोल नगर परिषद

  • अध्यक्ष पद भले ही बचा रहा हो लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते उनकी कुर्सी खतरे में आ गई है।

  • याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, गौरव अग्रवाल, अधिवक्ता मोहित खजांची तथा अधि। महेश धात्रक ने पैरवी की।

  • काटोल नगर परिषद अध्यक्ष को लेकर चल रहा यह विवाद स्थानीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com