नागपुर-काटोल हाईवे निर्माण को लेकर हाईकोर्ट सख्त, मार्च 2027 तक काम पूरा करने की डेडलाइन तय

Nagpur Katol Highway: बॉम्बे हाईकोर्ट ने नागपुर-काटोल राष्ट्रीय राजमार्ग के रुके हुए निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए मार्च 2027 की अंतिम समय-सीमा तय की है। NHAI ने कोर्ट में हलफनामा पेश किया।
Bombay High Court Nagpur Bench
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Highlights

  • नागपुर-काटोल राष्ट्रीय राजमार्ग के अधूरे निर्माण को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

  • अदालत ने राजमार्ग का काम पूरा करने के लिए मार्च 2027 की अंतिम समय-सीमा तय की।

  • NHAI ने 25 फरवरी 2026 के आदेश के अनुपालन में हलफनामा पेश किया।

  • शेष कार्यों और कमियों को दूर करने के लिए संबंधित कंपनियों को क्योर पीरियड नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी गई।

Bombay High Court Nagpur Bench: नागपुर-काटोल राष्ट्रीय राजमार्ग के रुके हुए निर्माण कार्य के संबंध में दायर जनहित याचिका पर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान 25 फरवरी 2026 को अदालत द्वारा दिए गए। आदेश के अनुपालन के संबंध में नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की ओर से कोर्ट में हलफनामा प्रस्तुत् प्रस्तुत किया गया।

हाई कोर्ट ने इस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए राजमार्ग के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए मार्च 2027 को अंतिम समय सीमा निधारित की NHAI की ओर से अदालत में पक्ष रखते हुए।

वकीलों ने बताया कि राजमार्ग पर शेष बचे हुए कार्यों और कमियों को 60 दिनों के भीतर दूर करने के लिए अग्रवाल ग्लोबल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स जॉइंट स्टॉक कंपनी इंडस्ट्रियल 'वोजरोजदेनिया' एसोसिएशन को क्योर पीरियड नोटिस' जारी किया गया है।

जॉइंट स्टाक कम्पनी का एग्रीमेंट रद्द

इनमें से आम्रवाल इंफ्राटेक को काम पूरा करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय विस्तार दिया गया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि मैसर्स जॉइट स्टॉक वापनी का अनुबंध रद्द कर दिया गया है और इस क्षेत्र का शेष कार्य एनएचएआई अब अपनी सीची देखरेख में पूरा करेगा।

इसके अलावा बॉम्बे हाई कोर्ट ने एनएचएआई को अब तक हुए कार्यों और अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए।

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नागपुर और काटोल के बीच सफर करने वाले

जनहित याचिका में याचिकाकर्ता की ओर से अधि, रोहन धात्रक और नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की तरफ से अधि. ए.ए. काठाणे ने पैरवी किए हैं।

अदालत की इस सख्ती और तय समय-सीमा के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि नागपुर और काटोल के बीच रोजाना सफर करने वाले हजारों यात्रियों और चालकों को जल्द ही खराब और अधूरी सड़कों से राहत मिलेगी, जिससे यातायात सुचारू और सुरक्षित हो सकेगा।

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