डेटा चोरी, डिजिटल ब्लैकमेलिंग और अब आतंकी कनेक्शन की जांच! नागपुर पुलिस की गिरफ्त में आया शातिर साइबर ठग
Nagpur Instant Loan Scam: नागपुर साइबर पुलिस ने इंस्टेंट लोन ऐप के जरिए डेटा चोरी, अश्लील फोटो बनाकर ब्लैकमेलिंग और साइबर वसूली करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया।
- Written By: अंकिता पटेल
इंस्टेंट लोन ऐप, साइबर ठगी, (सोर्स- नवभारत डिजाइन फोटो)
Nagpur Instant Loan Scam App Blackmail Racket: नागपुर शहर में साइबर पुलिस ने इंस्टेंट लोन एप के जरिए लोगों का निजी डेटा चुराकर अश्लील फोटो बनाकर ब्लैकमेल करने और पैसे वसूलने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने बैरसिया, जिला भोपाल (मप्र) आरोपी कामिल सिद्दीकी (31) को गिरफ्तार किया।
आरोप है कि वह ‘मस्त मनी इंस्टेंट लोन एप’ के माध्यम से हजारों लोगों को ठगने, डिजिटल ब्लैकमेलिंग और साइबर जबरन वसूली कर रहा था। यह एप कामिल ने ही डेवलप किया था जिसे अब प्ले स्टोर से हटवा दिया गया है। इस संबंध में आतंकवादी गतिविधियों की भी जांच पुलिस कर रही है।
RBI मान्यता प्राप्त बताकर फैलाया जाल
पुलिस उपायुक्त (साइबर क्राइम) दीपक अग्रवाल ने बताया कि नागपुर निवासी एक युवती ने 9 जून को साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि वह ‘मस्त मनी इंस्टेंट लोन एप’ के जरिए ठगी और ब्लैकमेलिंग का शिकार हुई है। उसने 20,000 रुपये का लोन लिया लेकिन 26,000 रुपये लौटा भी दिये। इसके बाद और अधिक रकम के लिए उसकी फर्जी अश्लील फोटो से ब्लैकमेल किया जा रहा है।
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जांच में पता चला कि यह एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है और खुद को आरबीआई से मान्यता प्राप्त लोन प्लेटफॉर्म बताकर लोगों का विश्वास जीतता था। एप के जरिए यूजर्स को तुरंत और आसान लोन देने का लालच दिया जाता था।
लोन देने के नाम एपीके फाइल्स के जरिये टर्म एंड कंडीशन की मंजूरी लेकर व्यक्ति के मोबाइल और सोशल अकाउंट समेत आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो और अन्य निजी दस्तावेज हासिल किए जाते थे। शुरुआत में छोटे लोन देकर एप को भरोसेमंद दिखाने की कोशिश की जाती थी।
‘मस्त मनी’ ऐप से 234 करोड़ की ठगी का शक, जांच तेज
जांच में सामने आया कि ‘मस्त मनी इंस्टेंट लोन एप’ को देशभर में करीब 5.32 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। इनमें से 2.98 लाख यूजर्स ने संदेह होने के बाद एप हटा दिया, जबकि करीब 2.34 लाख मोबाइल फोन में एप सक्रिय है।
पुलिस के अनुमान के अनुसार, यदि प्रत्येक सक्रिय यूजर से औसतन 10,000 रुपये की ठगी की गई होगी तो यह गिरोह करीब 234 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर चुका है।
जांच के बाद पुलिस ने इस एप को गूगल प्ले स्टोर से हटवा दिया। नागपुर साइबर पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, कथित मास्टरमाइंड और आर्थिक लेन-देन से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है।
यह भी देखा जा रहा है कि कहीं ठगी की इस रकम को आतंकवादी गतिविधियों में तो नहीं लगाया जा रहा। डीसीपी अग्रवाल ने कहा कि यह पूरी जांच के बाद ही बताया जा सकेगा।
फोटो मॉर्फ कर करते थे ब्लैकमेल
लोन और ब्याज की रकम वापस मिलने के बाद प्राप्त डेटा से हासिल पीड़ितों की तस्वीरें डाउनलोड कर आरोपी उन्हें डिजिटल तरीके से अश्लील फोटो में बदल देते थे। इसके बाद इन तस्वीरों को रिश्तेदारों, दोस्तों और सोशल मीडिया संपर्कों में वायरल करने की धमकी देकर अतिरिक्त रकम की मांग की जाती थी।
पीड़ितों को लगातार फोन कॉल और ऑनलाइन मैसेज के जरिए मानसिक रूप से परेशान किया जाता था। इस तरह आरोपी साइबर जबरन वसूली का नेटवर्क चला रहे थे।
तकनीकी जांच से पहुंची पुलिस आरोपी तक
नागपुर साइबर पुलिस ने एप के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, संचार माध्यमों और पैसों के लेन-देन की तकनीकी जांच शुरू की। डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस भोपाल जिले के बैरसिया पहुंची और कामिल सिद्दीकी को गिरफ्तार किया।
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पुलिस ने आरोपी के पास से वनप्लस नॉर्ड-2 मोबाइल और डेल लैटीट्यूड-5420 लैपटॉप जब्त किया है। इनकी कीमत करीब 1 लाख रुपये चताई गई है। प्रारंभिक जांच में उपकरणों में रिमोट एक्सेस और ऑनलाइन गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले सॉफ्टवेयर मिलने की जानकारी सामने आई है।
