डिग्रियां व तजुर्बा धरा रह गया, ठगों का सिम कार्ड वाला आइडिया चल गया; नागपुर के रिटायर्ड अभियंता के साथ ठगी

Nagpur Cyber Fraud: नागपुर में साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक सेवानिवृत्त अभियंता से 86.90 लाख रुपये ठग लिए।
Degrees and experience counted for nothing; the fraudsters' SIM card scheme succeeded retired Nagpur engineer swindled.
नागपुर, साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट,प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
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Nagpur Money Laundering Scam: नागपुर जिले में मनी लॉन्ड्रंग केस में सिम कार्ड इस्तेमाल होने का झांसा देकर साइबर ठगों ने एक सेवानिवृत्त अभियंता को 86.90 लाख रुपये का चूना लगा दिया। लगातार एक महीने तक उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखने का झांसा दिया गया और रकम वसूली गई।

साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट और धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार अंबाझरी क्षेत्र में रहने वाले 65 वर्षीय पीड़ित एनटीपीसी से सेवानिवृत्त अभियंता हैं।

मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तारी का डर दिखाकर ठगी की साजिश

6 मई को उनके मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से दिल्ली में एक सिम कार्ड जारी किया गया है, जिसका दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके बाद पीड़ित को लगातार वीडियो कॉल के जरिए अलग-अलग व्यक्तियों ने खुद को दिल्ली पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और न्यायालय का अधिकारी बताकर संपर्क किया। ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रंग और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी।

फर्जी दस्तावेज भेजकर विश्वास जीता, पत्नी को शक होने पर खुला ठगी का राज

विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र, ईडी के दस्तावेज, अदालत के आदेश और गिरफ्तारी वारंट जैसी नकली कागजात भी भेजे। उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रखा जाता था और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं करने की हिदायत दी गई। पूछताछ के नाम पर साइबर ठगों ने उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल की और विभिन्न खातों में रकम स्थानांतरित करने के लिए दबाव बनाया।

पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में 65 लाख रुपये, 14 लाख रुपये और 7.90 लाख रुपये सहित कुल 86.90 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में उनकी पत्नी को पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ। जांच-पड़ताल करने पर ठगी का खुलासा हुआ। इसके बाद पीड़ित ने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई।

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