नागपुर में अवैध निर्माण पर ढिलाई, एमआरटीपी नोटिस के बाद भी कार्रवाई नहीं, HC ने मांगा जवाब
Nagpur Municipal Corporation Action: नागपुर में अवैध निर्माण पर कार्रवाई में देरी पर हाई कोर्ट सख्त। मनपा को 6 हफ्ते में आदेश लागू करने का अंतिम मौका दिया गया।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर अवैध निर्माण, हाई कोर्ट आदेश(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Illegal Construction: नागपुर वर्धमाननगर कॉलोनी निवासी राजकुमार श्यामसुंदर खुराना द्वारा किए गए अवैध निर्माण के खिलाफ महानगरपालिका के लकड़गंज जोन में शिकायत की गई थी। हालांकि शिकायत के आधार पर लकड़गंज जोन के सहायक आयुक्त द्वारा एमआरटीपी एक्ट की धारा 53 (1) के तहत नोटिस तो जारी किया गया किंतु कार्रवाई नहीं होने के कारण नंदकिशोर खुराना ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने अपने ही आदेश का पालन न करने और अवैध निर्माण पर कार्रवाई में ढिलाई बरतने पर महानगरपालिका के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने महानगरपालिका को अंतिम अवसर देते हुए 6 सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण के खिलाफ अपने पूर्व आदेश को अंजाम तक पहुंचाने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता की अधि। शशांक अग्रवाल ने पैरवी की।
महानगरपालिका की लापरवाही
सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की जांच के बाद सहायक आयुक्त ने 16 फरवरी 2026 को एक आदेश पारित किया था जिसमें यह निष्कर्ष निकाला गया था कि किया गया निर्माण अवैध है। महानगरपालिका ने प्रतिवादी को 15 दिनों के भीतर इस अवैध निर्माण को हटाने का निर्देश दिया था। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया था कि यदि 15 दिनों में निर्माण नहीं हटाया गया तो महानगरपालिका स्वयं इसे ध्वस्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
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याचिकाकर्ताओं के वकील शशांक अग्रवाल ने अदालत को बताया कि 16 फरवरी 2026 का आदेश संबंधित पक्ष को तामील होने के बावजूद 2 महीने से अधिक समय बीत जाने पर भी न तो निर्माण करने वाले ने उसे हटाया और न ही महानगरपालिका के अधिकारियों ने अपने ही आदेश का पालन कराने के लिए कोई कदम उठाया।
अधिकारियों को एक आखिरी मौका
प्रशासन की इस निष्क्रयता को देखते हुए याचिकाकर्ताओं ने 11 मार्च, 2 अप्रैल, 6 अप्रैल और 15 अप्रैल 2026 को महानगरपालिका को लिखित निवेदन भी दिए लेकिन अधिकारियों ने इन पर कोई ध्यान नहीं दिया, मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत महानगरपालिका के अधिकारियों को उनके वैधानिक कर्तीयों के निर्वहन में विषालता और आदेशों की अवहेलना के लिए ‘कारण बताओ नोटिस जारी करने ही वाली थी।
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हालांकि कोर्ट ने अधिकारियों को एक आखिरी मौका देने का फैसला किया, न्यायालय ने रिट याचिका का निपटारा करते हुए लकड़गंज जोन के सहायक आयुक्त को निर्देश दिया है कि यदि कोई अन्य कानूनी अड़वन न हो तो वे याचिकाकर्ताओं के निवेदन पर निर्णय लें और 16 फरवरी 2026 के अपने आदेश (तोड़ कार्रवाई) का पालन सुनिश्चित करे।
