हाई कोर्ट का मनपा को अल्टीमेटम: इतवारी के अवैध ढांचे पर तुरंत लें फैसला; 5 साल की देरी पर अदालत सख्त!
Nagpur High Court Verdict: इतवारी में अवैध धार्मिक ढांचे पर हाई कोर्ट सख्त! मनपा को 8 हफ्ते में फैसला लेने का आदेश। प्लॉट नंबर 58 पर अतिक्रमण हटाने में प्रशासन की देरी पर खिंचाई।
- Written By: प्रिया जैस
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
Itwari Illegal Encroachment: नागपुर जनरल मर्चेंट को-ऑपरेटिव मार्केट को-हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड ने शहर के सेंट्रल एवेन्यू क्षेत्र में स्थित प्लॉट नंबर 58 पर अवैध धार्मिक ढांचे और अतिक्रमण को हटाने में विफल रहने पर महानगरपालिका के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की।
याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलों के बाद न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने महानगरपालिका को इतवारी इलाके में स्थित धार्मिक ढांचे के पूर्ण स्थानांतरण के संबंध में लंबित आवेदन पर 8 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का कड़ा निर्देश दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गिरीश दीपवानी ने पैरवी की।
5 साल से लंबित था आवेदन
याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे अधिवक्ता गिरीश दीपवानी ने बताया कि सोसाइटी ने 4 जनवरी 2021 को मनपा के पास एक प्रतिनिधित्व जमा किया था जिसमें धार्मिक ढांचे को स्थानांतरित करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि लगभग 5 साल बीतने के बाद भी महानगरपालिका ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है।
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पुराने फैसले का हवाला देते हुए बताया कि यह मामला हाई कोर्ट द्वारा 7 अक्टूबर 2019 को रिट याचिका संख्या 8687/2018 (हजरत बाबा सैयद मुरादअलीशाह ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य) में दिए गए एक फैसले पर आधारित है। इसी फैसले के आलोक में सोसाइटी ने ढांचे के स्थानांतरण के लिए प्रशासन से गुहार लगाई थी।
अवैध रूप से धार्मिक ढांचा खड़ा
हाई कोर्ट ने रिट याचिका का निपटारा करते हुए मनपा को निर्देश दिया कि वह 8 सप्ताह के भीतर इस पर फैसला ले। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय लेने से पहले ट्रस्ट को नोटिस जारी किया जाए और याचिकाकर्ता एवं ट्रस्ट दोनों को सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किया जाए।
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प्रशासन को अपने निर्णय की जानकारी सभी संबंधित पक्षों को फैसला होने के 2 सप्ताह के भीतर देनी होगी। याचिकाकर्ता सोसाइटी के अनुसार सेंट्रल एवेन्यू स्थित इस प्लॉट पर उनके पास वर्ष 2050 तक का वैध लीज अधिकार है। आरोप है कि हजरत बाबा सैयद मुरादअलीशाह ट्रस्ट ने यहां अवैध रूप से धार्मिक ढांचा खड़ा किया।
याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट ने 7 अक्टूबर 2019 को ही ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी थी और उन्हें स्थानांतरण के लिए केवल 2 सप्ताह का समय दिया था। इसके बावजूद, नगर निगम ने अब तक इस ढांचे को पूरी तरह हटाने या मलबे को साफ करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
