MPSC परीक्षा प्रणाली पर भड़के छात्र, समिति के सामने रखी 23 मांगें, ऑनलाइन एग्जाम रद्द करने की मांग

MPSC Student Protest Nagpur: नागपुर में उच्च स्तरीय समिति के सामने MPSC अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन परीक्षा के विरोध, वस्तुनिष्ठ पद्धति की वापसी और 23 सूत्रीय मांगों को लेकर कड़ा आक्रोश जताया।
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अपर मुख्य सचिव वी. राधा की अध्यक्षता वाली भर्ती परीक्षा सुधार समिति फोटो सोर्स- नवभारत
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MPSC Exam News: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा प्रणाली को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। बुधवार को अपर मुख्य सचिव वी। राधा की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय भर्ती परीक्षा सुधार समिति के समक्ष छात्रों ने 23 सूत्रीय मांगों का पुलिंदा रखा।

नागपुर में 'संवाद' सत्र के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और नियोजन विभाग की इमारत पुलिस छावनी में तब्दील नजर आई जहां हर छात्र की गहन जांच के बाद ही प्रवेश दिया गया।

डिस्क्रिप्टिव पैटर्न और ऑनलाइन परीक्षा का विरोध छात्रों ने ऑनलाइन परीक्षा का सख्त विरोध करते हुए कहा कि इससे सामूहिक नकल और गड़बड़ियों की आशंका बढ़ती है, इसलिए परीक्षाएं केवल ऑफलाइन ही ली जाएं।

मुख्य परीक्षा में वर्णनात्मक पद्धति के बजाय फिर से वस्तुनिष्ठ बहुविकल्पीय पद्धति लागू करने की मांग की गई। छात्रों का आरोप है कि आयोग के पास वर्णनात्मक उत्तर पुस्तिकाओं के निष्पक्ष मूल्यांकन के लिए सक्षम तंत्र उपलब्ध नहीं है।

शैक्षणिक प्रमाणपत्र की जांच

खेल, दिव्यांग या शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की सख्त जांच के बाद ही नियुक्ति दी जाए, साथ ही 'ऑप्टिंग आउट' विकल्प को दोबारा प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

MPSC की क्षमता बढ़ाने और क्षेत्रीय कार्यालयों की मांग

MPSC आयोग की कार्यप्रणाली में तेजी लाने के लिए सदस्यों की संख्या 5 से बढ़ाकर 11 करने की मांग रखी गई। इसके अलावा अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, नागपुर जिला और नासिक में एमपीएससी के क्षेत्रीय कार्यालय और हेल्पलाइन शुरू करने का सुझाव दिया गया।

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छात्रों द्वारा रखी गईं मुख्य मांगें

  • प्रश्नपत्रों के गलत सवालों पर आपत्ति दर्ज करने का शुल्क समाप्त हो या आपति सही पाए जाने पर शुल्क वापस किया जाए।

  • प्रारंभिक परीक्षा के अंक सार्वजनिक हों और परीक्षा के 20 से 21 दिनों के भीतर परिणाम घोषित किया जाए।

  • ग्रुप 'ए' से 'सी' तक की सभी परीक्षाओं का वार्षिक टाइमटेचल दिवाली से पहले जारी हो और उसका सख्ती से पालन हो।

  • पदोन्नति के बजाय एमपीएससी के जरिए सीधी भर्ती के पदों की संख्या बढ़ाई जाए।

  • 2021 से हुई सभी विवादित परीक्षाओं की न्यायिक जांच के लिए समिति बने और MPSC आयोगके अधिकारियों-कर्मचारियों का हर साल सरकारी ऑडिट हो।

  • औषधि निरीक्षक परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

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