बुआई के बाद बढ़ी नागपुर में खरपतवार नाशकों की डिमांड, किसानों की पहली पसंद हिटवीड मैक्स
Nagpur Herbicide: बुआई के बाद नागपुर में खरपतवार नाशकों की मांग तेजी से बढ़ गई है। कपास, सोयाबीन और तुअर की फसलों के लिए हिटवीड मैक्स, परस्यूट, साकेत और राउंडअप की खरीद जोरों पर है।
- Written By: अंकिता पटेल
खरपतवार नाशक,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Pursuit News: नागपुर बीज खरीदी और बुआई के बाद अब किसानों की डिमांड खरपतवार नाशक को लेकर बढ़ी है। इसकी खरीदी के लिए किसान बीज बाजार में पहुंच रहे हैं। कपास की फसल के लिए हिटवीड मैक्स और सोयाबीन व तुअर की फसल के लिए परस्यूट साकेत खरपतवार नाशक की खरीदी हो रही है।
इसके साथ ही आरआर कपास सहित सभी तुअर और मिर्ची की फसलों के लिए राउंडअप (ग्लाइफोसेट) खरपतवारनाशक की डिमांड जोरों पर है। इस बार खरपतवार नाशक की कीमतें पिछली वर्ष की तरह ही चल रही हैं।
परस्यूट की कीमत जहां 1,200 रुपये चल रही है, वहीं साकेत खरपतवार नाशक 980 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। टरगा सुपर 1,300 रुपये प्रति लीटर व हिटवीड मैक्स 3,200 रुपये लीटर बिक रहा है। राउंडअप 450 रुपये लीटर मिल रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
नासिक जल संकट के बीच हजारों लीटर पानी बर्बाद, तपोवन में मुख्य जलवाहिनी का वाल्व लीक
नासिक में बनेगी भव्य ‘भीमसृष्टि’, संजय शिरसाट ने कहा बाबासाहेब के विचारों को मिलेगा प्रेरणास्थल
गड़चिरोली के एटापल्ली पेट्रोलपंप घोटाले का मामला विधानसभा तक पहुंचा, जांच और कार्रवाई की मांग तेजम
गडचिरोली में मजदूर की मौत, परिवार को नौकरी और 50 लाख मुआवजे की मांग
कम नहीं हुई चीन पर निर्भरता
व्यापारियों के अनुसार राउंडअप एक ऐसा खरपतवार नाशक है, जिससे मिट्टी की उर्वरकता कम होती है, साथ ही पर्यावरण के लिए अच्छा नहीं है। इसके बावजूद भी चोर कपास बीज, मिर्ची व तुअर के लिए ग्लाइफोसेट (राउंडअप) खरपतवार नाशक की बहुत अधिक डिमांड है। इस समय अन्य खरपतवार नाशक की उपलब्धता अच्छी बनी हुई है।
वहीं इन खरपतवार नाशकों के स्प्रे में उपयोग होने वाले पंप के लिए किसानों को अभी चीन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। चीन के बैटरी चलित नेपसैक स्प्रे पंप सस्ते और टेक्नोलॉजी में आगे होने के कारण नागपुर सहित पूरे देश में इन्हीं पंप की डिमांड है।
करीब 85 प्रश स्प्रे पंप के लिए चीन पर निर्भरता है। दवाओं के लिए उपयोग होने वाला 70 से 75 प्रश कच्चा माल भी चीन से आता है। कच्चा माल आने के बाद दवाओं का निर्माण होता है।
व्यापारी कहते हैं कि हमारे कृषि प्रधान देश को कृषि में उपयोग होने वाली चीजों के लिए चीन पर निर्भरता कम करनी चाहिए। इसी निर्भरता के चलते ही वह आंखें दिखाता है। चीन से प्लास्टिक पंप, बैटरी पंप सहित अन्य तरह की कृषि संबंधी चीजें आती हैं।
यह भी पढ़ें:-नागपुर एयरपोर्ट विस्तार के लिए AID के प्रयास सराहनीय; आभार समारोह में बोले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी
अच्छी बनी हुई है उपलब्धता
व्यापारियों के अनुसार मार्केट में दवाओं की उपलब्धता अच्छी-खासी बनी हुई है। देश में स्प्रे सहित विविध तरह की छोटी-बड़ी वस्तुएं चीन से आती हैं। कृषि उत्पादों के लिए चीन की निर्भरता से देश को बाहर निकलना पड़ेगा। ऐसा नहीं हुआ तो किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और इससे उत्पादन में भी परेशानी खड़ी हो सकती है।
इस तरह है कीमतें
| दवा | कीमत (₹ प्रति लीटर) |
|---|---|
| परस्यूट | 1,200 |
| साकेत | 980 |
| टरगा सुपर | 1,300 |
| हिटवीड मैक्स | 3,200 |
| ग्लाइफोसेट | 450 |
