

Gorewada Zoo Tender Case: नागपुर गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जू में टेंडर और भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए जनहित याचिकाओं के संभावित दुरुपयोग को रोकने और याचिकाकर्ता की नीयत परखने के लिए याचिकाकर्ता को 2 सप्ताह के भीतर अदालत में 5 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया।
सुनील गौतम द्वारा महाराष्ट्र राज्य के वन और राजस्व विभाग तथा अन्य के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि एस्सेल वर्ल्ड और एफजीजेड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जू में जारी किए गए सभी टेंडरों को रद्द किया जाए।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन टेंडरों में सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग के 27 सितंबर 2018, 25 जनवरी 2019 और 20 मई 2021 के सरकारी प्रस्तावों के अनुसार उचित भर्ती प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। सुनवाई के बाद न्या। अनिल किलोर और न्या। रजनीश व्यास ने कहा कि
याचिकाकर्ता 2018 की भर्ती प्रक्रिया को पूरे 8 साल के लंबे अंतराल के बाद चुनौती दे रहा है। अदालत ने इस तथ्य पर भी गंभीरता से गौर किया कि इसी प्रतिष्ठान (गोरेवाड़ा जू) के कर्मचारियों की नियुक्तियों को चुनौती देने वाली एक पिछली जनहित याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा है कि याचिकाकर्ता को इस अदालत में 2 सप्ताह के भीतर 5 लाख रुपये जमा करने होंगे, यदि याचिकाकर्ता 2 सप्ताह के भीतर यह राशि जमा करने में विफल रहता है तो यह जनहित याचिका स्वत: ही खारिज मान ली जाएगी।
5 लाख रुपये की राशि जमा होने के बाद ही प्रतिवादी क्रमांक 1 से 4 को नोटिस जारी किया जाएगा। यदि नोटिस जारी होता है तो प्रतिवादियों को 10 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील डीपी ठाकरे, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पीडी शर्मा और विशाखा माधवानी ने पैरवी की।