Nagpur News: नागपुर देगा आदिवासी संस्कृती को वैश्विक पहचान, सुराबर्डी में बनेगा गोंडवाना आदिवासी सांस्कृतिक संग्रहालय
आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने कहा कि मुख्यमंत्री फडणवीस की संकल्पना और पहल से आदिवासी समुदाय की संस्कृति को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए सुराबर्डी में भव्य गोंडवाना आदिवासी सांस्कृतिक संग्रहालय की जाएगी।
- Written By: आंचल लोखंडे
नागपुर देगा आदिवासी संस्कृती को वैश्विक पहचान। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
नागपुर: आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संकल्पना और पहल से आदिवासी समुदाय की संस्कृति को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए सुराबर्डी में भव्य गोंडवाना आदिवासी सांस्कृतिक संग्रहालय की स्थापना की जाएगी। यह संग्रहालय लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में बनाया जाएगा। मंत्री अशोक उइके ने एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से इस परियोजना की समीक्षा की और सभी प्रक्रियाएं 30 मई से पहले पूरी करने को कहा।
जून महीने में इस काम की प्रत्यक्ष शुरुआत होने की उम्मीद है। इस संग्रहालय के माध्यम से आदिवासी संस्कृति का दर्शन हो सकेगा। संग्रहालय में 45 विभिन्न जनजातीय जातियों के सांस्कृतिक, सामाजिक और पारंपरिक पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा। यह संग्रहालय भावी पीढ़ियों को आदिवासी संस्कृति की विरासत को समझने और संरक्षित करने के लिए प्रेरित करेगा। मंत्री उइके ने कहा कि इस संग्रहालय के निर्माण के लिए निधि की कमी नहीं होने दी जाएगी।
सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश
उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में गोंड, भील, कोलाम, कोरकू, वारली, महादेव कोली, कातकरी, पारधी सहित विभिन्न आदिवासी जातियों के सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला जाएगा। इस संग्रहालय में स्वतंत्रता संग्राम में इन समुदाय के सदस्यों द्वारा दिए गए योगदान, इतिहास, रीति-रिवाजों, परंपराओं, नृत्य, संगीत, कला और आभूषणों को रेखांकित किया जाएगा।
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वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित
प्रस्तुतीकरण के दौरान आदिवासी विकास विभाग की अतिरिक्त आयुक्त आयुषी सिंह, आदिवासी विकास विभाग के कार्यकारी अभियंता उज्ज्वल डाबे, संयुक्त आयुक्त बबीता गिरि, प्रकल्प अधिकारी नितिन इसोकार सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
संग्रहालय पर्यावरण अनुकूल बनाने पर जोर
संग्रहालय को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर जोर दिया जाएगा। संग्रहालय के निर्माण के दौरान रेन वाटर हार्वेस्टिंग, पर्याप्त वृक्षारोपण, सौर ऊर्जा और एआई प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि भवन निर्माण के लिए सावनेर स्टोन पत्थर का मुख्य रूप से उपयोग किया जाएगा।
15 एकड़ क्षेत्रफल
यह संग्रहालय लगभग 15 एकड क्षेत्रफल में फैला होगा और इसमें महाराष्ट्र की 45 से अधिक आदिवासी जनजातियों की सांस्कृतिक, सामाजिक और पारंपरिक विशेषताओं का संकलन किया जाएगा. संग्रहालय के निर्माण की प्रक्रिया का आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने हाल ही में प्रस्तुतिकरण के माध्यम से आकलन किया था.
30 मई तक सभी औपचारिकताएं पूर्ण
मंत्री उइके ने निर्देश दिए हैं कि 30 मई तक सभी औपचारिकताएं पूर्ण की जाएं ताकि जून माह से निर्माण कार्य प्रारंभ किया जा सके. इस संग्रहालय में गोंड, भील, कोलाम, कोरकू, वारली, महादेव कोली, कातकरी, पारधी जैसी प्रमुख जनजातियों के इतिहास, नृत्य, संगीत, कला, आभूषण, परंपराएं तथा स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा. यह परियोजना आने कला, आभूषण, परंपराएं तथा स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा. यह परियोजना आने वाली पीढ़ियों को आदिवासी संस्कृति को समझने-अपनाने और संरक्षित करने की दिशा में प्रेरित करेगी.
